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भारतीय नागरिकता के नियम बदले! अब पासपोर्ट सरेंडर किए बिना नहीं मिलेगी Citizenship, सरकार का बड़ा फैसला

Ministry of Home Affairs: यानी गृह मंत्रालय ने भारतीय नागरिकता को लेकर बड़ा बदलाव किया है। केंद्र सरकार ने नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नए नागरिकता (संशोधन) नियम 2026 का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके बाद अब भारतीय नागरिकता पाने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त हो जाएगी।

नए नियमों के मुताबिक, अब भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अपना विदेशी पासपोर्ट सरेंडर करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम दोहरी नागरिकता और दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।

क्या बदला है नए नियमों में?

सरकार ने नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 18 में बदलाव करते हुए 2009 के नियमों की अनुसूची IC में नया पैराग्राफ (iiiA) जोड़ा है।

इस बदलाव के तहत:

  • भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन स्वीकार होने के बाद
  • 15 दिनों के भीतर विदेशी पासपोर्ट सरेंडर करना होगा
  • पासपोर्ट सरेंडर की लिखित सहमति देनी होगी
  • इसके बाद ही नागरिकता आवेदन को अंतिम मंजूरी मिलेगी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि संबंधित सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट या सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट के सामने यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

किन लोगों पर पड़ेगा असर?

यह नियम उन विदेशी नागरिकों पर लागू होगा जो भारत की नागरिकता लेने के लिए आवेदन कर रहे हैं।

खासतौर पर:

  • विदेशी पासपोर्ट धारक
  • OCI या भारतीय मूल के लोग
  • लंबे समय से भारत में रह रहे विदेशी नागरिक
  • भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले प्रवासी

इन सभी को अब भारतीय नागरिकता मिलने से पहले अपना पुराना पासपोर्ट छोड़ना होगा।

डबल पासपोर्ट पर भी सख्ती

सरकार ने नाबालिगों के लिए डुअल पासपोर्ट यानी दोहरी नागरिकता जैसे मामलों पर भी सख्ती बढ़ा दी है।

गृह मंत्रालय के अनुसार:

  • बच्चों के लिए डबल पासपोर्ट नियमों की निगरानी कड़ी होगी
  • दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया मजबूत की जाएगी
  • डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाएगा

सरकार का मानना है कि इससे फर्जी पहचान और इमिग्रेशन से जुड़े जोखिम कम होंगे।

अब मिलेगा ई-OCI कार्ड

Government of India ने प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है।

नए नियमों के तहत:

  • पेपर आधारित प्रक्रिया धीरे-धीरे खत्म होगी
  • ई-OCI कार्ड जारी किए जाएंगे
  • आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी

इससे विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

बायोमेट्रिक डेटा देना होगा जरूरी

नए नियमों के तहत अब पासपोर्ट और नागरिकता आवेदन करने वालों को अपना बायोमेट्रिक डेटा शेयर करने की सहमति भी देनी होगी।

इसका मकसद:

  • फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन सिस्टम तैयार करना
  • भविष्य में ऑटोमैटिक एनरोलमेंट सुविधा देना
  • एयरपोर्ट सुरक्षा और पहचान प्रक्रिया मजबूत करना

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भारत की डिजिटल इमिग्रेशन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सरकार ने क्यों किया बदलाव?

सरकार का कहना है कि बदलते वैश्विक हालात और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए नागरिकता नियमों को अपडेट करना जरूरी हो गया था।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन बदलावों के पीछे कई बड़े कारण हैं:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करना
  • फर्जी दस्तावेज रोकना
  • दोहरी पहचान पर नियंत्रण
  • डिजिटल इमिग्रेशन सिस्टम विकसित करना

क्या भारत दोहरी नागरिकता देता है?

भारत फिलहाल पूर्ण दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता।

यानी यदि कोई विदेशी नागरिक भारतीय नागरिकता लेता है, तो उसे अपनी पुरानी नागरिकता और पासपोर्ट छोड़ना पड़ता है। हालांकि OCI कार्ड के जरिए कुछ विशेष सुविधाएं जरूर दी जाती हैं।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

इन नियमों का असर मुख्य रूप से उन लोगों पर पड़ेगा जो:

  • भारतीय नागरिकता लेने की प्रक्रिया में हैं
  • विदेशों से भारत में स्थायी रूप से बसना चाहते हैं
  • OCI या PIO सुविधाओं का लाभ लेते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रक्रिया सख्त जरूर होगी, लेकिन इससे सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनेगा।

केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता नियमों में किया गया यह बदलाव भारतीय नागरिकता प्रक्रिया को पहले से ज्यादा सख्त और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब विदेशी पासपोर्ट सरेंडर किए बिना भारतीय नागरिकता मिलना संभव नहीं होगा। सरकार का दावा है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और नागरिकता प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

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