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“5 जून को अचानक लापता हुआ परिवार, 48 घंटे बाद तीस्ता नदी ने उगले चार शव! मासूम बच्ची समेत सभी की दर्दनाक मौत”

दार्जिलिंग/गंगटोक। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जिसने पूरे सिक्किम और दार्जिलिंग क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। गंगटोक से सिलीगुड़ी जा रहा एक परिवार अचानक रास्ते से लापता हो गया था। परिजनों को उम्मीद थी कि शायद उनका संपर्क टूट गया होगा, लेकिन 48 घंटे बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया।

तीस्ता नदी की गहराइयों में डूबी एक कार से एक ही परिवार के चार लोगों के शव बरामद किए गए। मृतकों में एक मासूम बच्ची भी शामिल है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

अस्पताल में रिश्तेदारों से मिलने निकला था परिवार

जानकारी के अनुसार, पूर्वी सिक्किम के काबी लुंगचोक (लिंगडोक) क्षेत्र का रहने वाला यह परिवार 5 जून को सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रहा था। परिवार टाटा नेक्सॉन कार में सवार होकर गंगटोक से निकला था।

परिजनों के अनुसार, शाम के समय राम्बी क्षेत्र के पास परिवार से आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और किसी से कोई संपर्क नहीं हो सका।

जब देर रात तक परिवार के सदस्य सिलीगुड़ी नहीं पहुंचे तो परिजनों की चिंता बढ़ गई और अगले दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

मलबे के छोटे सुराग ने खोला बड़ा राज

परिवार की तलाश के लिए व्यापक स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। NDRF, SDRF, पश्चिम बंगाल पुलिस और स्थानीय बचाव दलों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया।

खोज के दौरान बाघपुल इलाके के पास भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में कार की बैटरी और बंपर के कुछ हिस्से मिले। इसी सुराग के आधार पर जांच टीम का ध्यान तीस्ता नदी की ओर गया।

बचाव दलों को आशंका हुई कि भूस्खलन और खराब मौसम के कारण वाहन सड़क से फिसलकर नदी में गिर गया होगा।

नदी की गहराई में मिली कार

शनिवार शाम को लगातार तलाश के दौरान तीस्ता नदी की गहराई में डूबी हुई कार का पता चला। हालांकि भारी बारिश, तेज बहाव और अंधेरे के कारण तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा नहीं किया जा सका।

रविवार सुबह फिर से अभियान शुरू किया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद बचावकर्मियों ने कार को बाहर निकाला और उसके अंदर से चार शव बरामद किए।

कौन थे मृतक?

हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान स्मारिका न्यौपाने (28), सैब्या न्यौपाने (27), जीका दहल (27) और पांच वर्षीय दित्या छेत्री के रूप में हुई है।

बताया जा रहा है कि तीनों वयस्क सरकारी कर्मचारी थे। स्मारिका न्यौपाने एसटीएनएम अस्पताल में नर्सिंग लेक्चरर के पद पर कार्यरत थीं। सैब्या न्यौपाने संस्कृति विभाग में जूनियर इंजीनियर थीं, जबकि जीका दहल बागवानी विभाग में कार्यरत थीं।

परिवार के साथ यात्रा कर रही मासूम दित्या छेत्री की मौत ने लोगों को सबसे अधिक भावुक कर दिया है।

हादसे की वजह क्या रही?

प्रारंभिक जांच में हादसे के पीछे खराब मौसम, लगातार बारिश और भूस्खलन को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग-10 (NH-10) लंबे समय से भूस्खलन और सड़क क्षति की समस्याओं से जूझ रहा है। बारिश के मौसम में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क का एक हिस्सा कमजोर होने और दृश्यता कम होने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर सीधे तीस्ता नदी में जा गिरा।

पूरे सिक्किम में शोक की लहर

जैसे ही हादसे की खबर सामने आई, पूरे सिक्किम में शोक की लहर फैल गई। मृतकों के परिवार, सहकर्मी और स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं।

सोशल मीडिया पर भी लोग मृतकों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और NH-10 की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन ने शुरू की जांच

स्थानीय प्रशासन ने हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रभावित सड़क क्षेत्र का निरीक्षण कर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की बात कही गई है।

प्रशासन का कहना है कि बारिश के मौसम में संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

दार्जिलिंग की तीस्ता नदी में हुआ यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों और जीवन का अंत साबित हुआ। अस्पताल में रिश्तेदारों का हालचाल जानने निकला परिवार खुद ऐसी त्रासदी का शिकार हो गया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को एक बार फिर सामने लाती है।

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