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LPG गैस बुकिंग के बाद नहीं मिला DAC नंबर? क्या रुक जाएगी डिलीवरी—जानिए पूरा नियम

देश: में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर भले ही वैश्विक स्तर पर तनाव की खबरें सामने आ रही हों, लेकिन भारत में फिलहाल ऐसी कोई कमी नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है। हालांकि, कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी में देरी जरूर देखने को मिल रही है।

इसी बीच एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक जरूरी नियम लागू किया गया है—डिलीवरी के समय DAC नंबर यानी OTP अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अगर बुकिंग के बाद DAC नंबर नहीं मिला, तो क्या गैस सिलेंडर की डिलीवरी रुक जाएगी?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि DAC नंबर क्या होता है। दरअसल, DAC (Delivery Authentication Code) एक वन टाइम पासवर्ड होता है, जो गैस सिलेंडर की डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। यह सिस्टम पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी डिलीवरी रोकने के लिए लागू किया गया है।

जब डिलीवरी बॉय आपके घर सिलेंडर लेकर आता है, तो वह आपसे यही DAC नंबर मांगता है। नंबर सही होने पर ही वह सिलेंडर डिलीवर करता है।

लेकिन समस्या तब आती है जब उपभोक्ता को बुकिंग के बाद DAC नंबर नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसके कई समाधान मौजूद हैं।

पहला तरीका यह है कि आप अपनी गैस कंपनी की आधिकारिक ऐप के जरिए DAC नंबर खुद देख सकते हैं। उदाहरण के लिए, IndianOil ONE ऐप में लॉगिन करके “Refill History” सेक्शन में जाकर आप अपना DAC नंबर प्राप्त कर सकते हैं।

दूसरा तरीका यह है कि आप डिलीवरी बॉय की मदद ले सकते हैं। अगर आपके मोबाइल पर DAC नंबर नहीं आया है, तो डिलीवरी एजेंट अपने सिस्टम या ऐप के जरिए नया DAC नंबर जनरेट कर सकता है। इसके बाद उसी नए OTP के आधार पर आपको गैस सिलेंडर मिल जाएगा।

तीसरा तरीका उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिनका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बंद हो गया है या बदल गया है। ऐसी स्थिति में आप डिलीवरी बॉय को नया मोबाइल नंबर दे सकते हैं। वह सिस्टम में इसे अपडेट करेगा और फिर नया DAC नंबर जनरेट किया जाएगा, जिससे डिलीवरी पूरी हो सकेगी।

इससे साफ है कि DAC नंबर न मिलने की स्थिति में भी गैस सिलेंडर की डिलीवरी पूरी तरह से नहीं रुकती। सरकार और गैस कंपनियों ने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई हुई है ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

हालांकि, उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपना मोबाइल नंबर हमेशा अपडेट रखें और गैस एजेंसी के साथ सही जानकारी साझा करें। इससे न केवल DAC नंबर समय पर मिलेगा, बल्कि डिलीवरी प्रक्रिया भी आसान और सुरक्षित बनी रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि DAC सिस्टम से फर्जी डिलीवरी और कालाबाजारी पर काफी हद तक रोक लगी है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सिलेंडर सही ग्राहक तक ही पहुंचे।

आज के डिजिटल दौर में यह व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित करती है। इसलिए जरूरी है कि लोग इस सिस्टम को समझें और सही तरीके से इसका उपयोग करें।

अगर LPG बुकिंग के बाद DAC नंबर नहीं मिलता है, तो भी गैस सिलेंडर की डिलीवरी रोकी नहीं जाती। ऐप, डिलीवरी बॉय या नंबर अपडेट जैसे विकल्पों के जरिए आसानी से नया DAC प्राप्त किया जा सकता है।

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