Live TV

For You

Channel

Menu

Live TV

For You

Channel

Menu

Live TV

For You

Channel

Menu

नाओदा में मतदान के बीच बवाल: TMC-AJUP समर्थकों की हिंसक झड़प, पत्थरबाजी-लाठीचार्ज से तनाव चरम पर

पश्चिम बंगाल: में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान मुर्शिदाबाद जिले का नाओदा क्षेत्र अचानक हिंसा और तनाव का केंद्र बन गया। मतदान के बीच शिवनगर गांव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के समर्थकों के बीच जबरदस्त झड़प हुई, जिसने पूरे इलाके का माहौल गरमा दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच पहले तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गई। इस दौरान पत्थरबाजी, लाठीचार्ज और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। कई कारों के शीशे तोड़ दिए गए और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। मतदान केंद्र के आसपास कुछ देर के लिए स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

इस पूरे विवाद के केंद्र में AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर रहे, जिन्होंने TMC पर गंभीर आरोप लगाए। कबीर का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी ने उनके कई उम्मीदवारों को पैसे देकर चुनाव मैदान से हटने के लिए मजबूर किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवारों की संख्या 142 से घटकर 115 रह गई है, क्योंकि कई प्रत्याशियों को 9 लाख से 30 लाख रुपये तक की पेशकश की गई।

कबीर जब नाओदा के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो वहां मौजूद TMC समर्थकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। “वापस जाओ” और “भाजपा एजेंट” जैसे नारे लगने लगे, जिससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव तेज हो गया और हिंसा भड़क उठी।

AJUP कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके बूथ स्तर के एक पदाधिकारी के साथ मारपीट की गई। वहीं TMC की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है और कहा गया कि विपक्ष माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है।

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए मौके पर तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर किया और मतदान प्रक्रिया को दोबारा सामान्य करने की कोशिश की। हालांकि, कुछ समय के लिए मतदान प्रभावित जरूर हुआ।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में 152 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी है। चुनाव आयोग पहले ही शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो हुमायूं कबीर पहले TMC से जुड़े रहे हैं और मुर्शिदाबाद की भरतपुर सीट से विधायक भी रह चुके हैं। हालांकि, विवादित बयानों के चलते उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी AJUP बनाई और अब चुनावी मैदान में सक्रिय हैं।

कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक को साधने के लिए विभिन्न समुदायों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।

इस घटना के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चुनावी हिंसा की ये घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बिना भय और दबाव के पूरा कराया जा सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे के चरणों में मतदान कितना शांतिपूर्ण रह पाता है।

नाओदा की घटना ने बंगाल चुनाव में बढ़ते तनाव और राजनीतिक टकराव को उजागर कर दिया है। प्रशासन की चुनौती अब केवल मतदान कराना नहीं, बल्कि उसे निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना भी है। आने वाले चरणों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी होने की उम्मीद है।

Read More News

[youtube-feed feed=1]
Scroll to Top