प्रयागराज: से जारी हुए यूपी बोर्ड 2026 के नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मेहनत और लगन के आगे किसी भी मुश्किल की कोई जगह नहीं होती। इस साल 12वीं के रिजल्ट में सीतापुर की शिखा वर्मा ने 97.60% अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। खास बात यह है कि शिखा एक मजदूर परिवार से आती हैं, जिसने उनकी सफलता को और भी प्रेरणादायक बना दिया है।
इस बार 12वीं की परीक्षा में कुल 80.38% छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं। परिणामों में एक बार फिर लड़कियों का दबदबा देखने को मिला है। टॉप-3 में सभी पांच स्थानों पर लड़कियों ने कब्जा जमाया है। दूसरे स्थान पर नंदनी गुप्ता और श्रिया वर्मा ने 97.20% अंक प्राप्त किए, जबकि तीसरे स्थान पर सुरभि यादव और पूजा पाल ने 97% के साथ जगह बनाई।
इन टॉपर्स की कहानियां संघर्ष और समर्पण से भरी हैं। नंदनी गुप्ता के पिता वेल्डिंग का काम करते हैं, जबकि सुरभि यादव के पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं। ऐसे में इन छात्राओं की उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गई है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अनुसार, इस वर्ष 12वीं परीक्षा के लिए करीब 24.79 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से लगभग 23.54 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च तक चली, जबकि मूल्यांकन प्रक्रिया 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच पूरी की गई।

पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रिजल्ट में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है। 2025 में जहां पास प्रतिशत 90.11% था, वहीं इस बार यह घटकर 80.38% रह गया। हालांकि, फर्स्ट डिवीजन में पास होने वाले छात्रों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
10वीं के नतीजों में भी बेटियों ने ही बाजी मारी। सीतापुर की कशिश वर्मा और बाराबंकी की अंशिका वर्मा ने 97.83% अंक के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया। दूसरे स्थान पर अदिति रहीं, जबकि तीसरे स्थान पर तीन छात्रों ने जगह बनाई।
10वीं में कुल पास प्रतिशत 90.42% रहा, जिसमें लड़कियों का पास प्रतिशत 93.76% और लड़कों का 87.30% रहा। यानी लड़कियां लड़कों से 6.46% आगे रहीं। यह अंतर पिछले कई वर्षों से लगातार बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां लगातार आगे बढ़ रही हैं।
जिलों की बात करें तो भदोही ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जहां 95.78% छात्र पास हुए। वहीं, ललितपुर सबसे पीछे रहा, जहां सिर्फ 80.22% छात्र ही सफल हो सके।
लखनऊ में भी इस बार अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। यहां हाईस्कूल का रिजल्ट 92.90% रहा, जो पिछले साल से थोड़ा बेहतर है। अद्रिजा चौरसिया और आरोही सिंह ने 96.17% अंक हासिल कर शहर में टॉप किया।
बोर्ड ने छात्रों के लिए स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराई है, ताकि जिन छात्रों को अपने अंकों पर संदेह है, वे पुनर्मूल्यांकन करवा सकें।
इस साल का रिजल्ट कई मायनों में खास रहा है—जहां एक ओर बेटियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, वहीं दूसरी ओर मेहनतकश परिवारों से आने वाले छात्रों ने यह साबित किया कि सफलता के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी जज्बा होता है।
यूपी बोर्ड 2026 के नतीजे यह स्पष्ट करते हैं कि बेटियां लगातार शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। शिखा वर्मा जैसी छात्राओं की सफलता समाज के लिए प्रेरणा है और यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।