अंतरराष्ट्रीय: स्तर पर तनाव के बीच Donald Trump ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। सोमवार रात आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका चाहे तो Iran को “एक रात में खत्म” कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो यह कार्रवाई “कल रात भी हो सकती है।”
ट्रम्प के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल युद्ध अमेरिका के हिसाब से चल रहा है और अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ व्यापक स्तर पर ऑपरेशन चलाए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन का भी खुलासा किया, जिसे उन्होंने हाल के दशकों का सबसे खतरनाक मिशन बताया। उनके अनुसार, ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए 155 सैन्य विमानों की मदद से ऑपरेशन चलाया गया। इस मिशन में फाइटर जेट, बॉम्बर विमान, ईंधन भरने वाले टैंकर और रेस्क्यू एयरक्राफ्ट शामिल थे।
ट्रम्प ने कहा कि यह निर्णय बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि “1-2 पायलट को बचाने के लिए 100 लोगों की जान दांव पर लगाई गई।” उन्होंने अमेरिकी सैनिकों की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि यह मिशन पूरी तरह सफल रहा और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

उन्होंने यह भी बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान दुश्मन को भ्रमित करने के लिए ‘डिकॉय रणनीति’ अपनाई गई। कई विमानों को अलग-अलग दिशाओं में भेजा गया ताकि ईरान को असली मिशन का अंदाजा न लग सके। ट्रम्प के मुताबिक, सात अलग-अलग स्थानों पर ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे दुश्मन भ्रमित रहा।
ट्रम्प ने एक घायल पायलट की बहादुरी का जिक्र करते हुए बताया कि जब एक अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया गया, तो उसमें सवार अधिकारी पैराशूट के जरिए नीचे उतरा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह पहाड़ी इलाके में चढ़ता रहा और खुद ही अपने जख्मों का इलाज करता रहा। बाद में उसे हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाल लिया गया।
इस दौरान ट्रम्प ने पहली बार यह भी स्वीकार किया कि ईरान ने एक अमेरिकी F-15 विमान गिराया था। हालांकि, उन्होंने इसे “दुश्मन की किस्मत” बताया और कहा कि यह एक “लकी हिट” थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प के साथ Pete Hegseth, Dan Kane और John Ratcliffe भी मौजूद थे।
ट्रम्प ने यह भी बताया कि इस रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर उनके सभी सैन्य सलाहकार एकमत नहीं थे। कुछ अधिकारियों का मानना था कि यह मिशन बेहद खतरनाक है और इसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है। इसके बावजूद उन्होंने इस ऑपरेशन को मंजूरी दी।
इसके अलावा, ट्रम्प ने मीडिया में लीक हुई जानकारी को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने यह जानकारी लीक की कि दूसरा पायलट भी ईरान में फंसा हुआ है, उसे ढूंढा जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो संबंधित मीडिया संस्थान के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
एक पत्रकार के सवाल पर ट्रम्प ने ईरान में हो रहे हमलों को लेकर कहा कि यदि इससे वहां के लोगों को “आजादी” मिलती है, तो वे इस दर्द को सहने के लिए तैयार होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के कुछ नागरिक अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं।
जब उनसे पूछा गया कि युद्ध खत्म होने वाला है या और बढ़ेगा, तो ट्रम्प ने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि यह पूरी तरह ईरान की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिए गए अल्टीमेटम का भी जिक्र किया और कहा कि ईरान को तय समय सीमा के भीतर फैसला करना होगा।
कुल मिलाकर, ट्रम्प के बयान से यह साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है। उनके आक्रामक तेवर और सैन्य कार्रवाई के दावे वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गए हैं।