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छत्तीसगढ़ पावर प्लांट ब्लास्ट में 17 मजदूरों की मौत, 36 झुलसे; वेदांता का बड़ा ऐलान—मुआवजा और नौकरी

छत्तीसगढ़: के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे हुए इस हादसे में अब तक 17 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जानकारी के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के हिस्सों में मशीनरी और कलपुर्जे बिखर गए। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, 4 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि अन्य घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान कई ने दम तोड़ दिया।

मृतकों में 4 मजदूर छत्तीसगढ़ के निवासी थे, जबकि बाकी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए हुए श्रमिक थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह हादसा न केवल एक राज्य बल्कि कई राज्यों के परिवारों को प्रभावित कर गया है।

घायलों का इलाज रायगढ़ मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल रायगढ़, जिंदल अस्पताल और रायपुर के निजी अस्पतालों में जारी है। कई मरीज 90% से अधिक झुलसे हुए हैं और उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी जान बचाने के प्रयास में जुटी है।

हादसे के बाद मजदूरों के परिजनों ने प्लांट के बाहर जमकर हंगामा किया। उन्होंने प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की। कई परिजनों का कहना है कि अभी भी कुछ मजदूर लापता हैं और उन्हें सही जानकारी नहीं दी जा रही है।

इस बीच जिला कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि हादसे के कारणों की गहन जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। इसके अलावा घायलों को 15-15 लाख रुपए की सहायता राशि देने का ऐलान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस घटना के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने मृतकों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए और घायलों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बॉयलर ब्लास्ट अक्सर तकनीकी खामियों, समय पर रखरखाव न होने या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण होते हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए।

यह हादसा एक बार फिर देश में औद्योगिक सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना केवल नियमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार में भी लागू किया जाना चाहिए।

सक्ती का यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों का आईना है। मुआवजा और जांच जरूरी हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

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