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CM योगी के ‘24 घंटे बिजली’ दावे पर सवाल! बस्ती के इस गाँव में 4 दिन से अंधेरा, ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए मांगा जा रहा चंदा?

बस्ती: उत्तर प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के सरकारी दावों के बीच बस्ती जिले के एक गाँव की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जिले के कप्तानगंज विद्युत उपकेंद्र से जुड़े बेलघाट गाँव में पिछले चार दिनों से अंधेरा पसरा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि तेज आंधी के दौरान ट्रांसफॉर्मर जल गया था, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक उसे बदला नहीं गया है।

गाँव में बिजली न होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। उमस भरी गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे अधिक परेशान हैं। मोबाइल फोन चार्ज करने से लेकर पेयजल व्यवस्था तक कई आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

चार दिन से बिजली गुल, बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी

जानकारी के अनुसार, बेलघाट गाँव दुबौला-हरदी फीडर से जुड़ा हुआ है। हाल ही में आई तेज आंधी और खराब मौसम के दौरान गाँव का ट्रांसफॉर्मर जल गया। इसके बाद पूरे गाँव की बिजली आपूर्ति ठप हो गई।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बिजली विभाग के टोल-फ्री नंबर पर कई बार शिकायत दर्ज कराई। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी संबंधित अधिकारियों और विभाग को टैग कर समस्या बताई गई। बावजूद इसके, समस्या का समाधान नहीं हो सका।

ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार केवल यह आश्वासन दिया गया कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और जल्द समाधान होगा, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो सकी।

गर्मी और उमस ने बढ़ाई मुश्किलें

बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ रहा है। रात में पंखे और कूलर बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों ने बताया कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत भी प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होने के कारण पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। कई घरों में मोटर नहीं चल पा रही है, जिससे पानी की समस्या भी खड़ी हो गई है।

ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए चंदा जुटाने का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग की बात कही जा रही है। इसी कारण गाँव के कुछ लोग आपस में चंदा इकट्ठा करने को मजबूर हो गए हैं।

हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली विभाग समय पर कार्रवाई करता, तो उन्हें ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

गाँव के लोगों का सवाल है कि जब वे नियमित रूप से बिजली बिल जमा करते हैं, तो फिर ट्रांसफॉर्मर बदलवाने और बिजली बहाल कराने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ क्यों उठाना पड़े?

सोशल मीडिया पर भी उठाई गई आवाज

ग्रामीणों ने अपनी समस्या को लेकर सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री और विद्युत विभाग के अधिकारियों को टैग करते हुए कई पोस्ट किए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेहतर बिजली व्यवस्था का दावा करती रही है। ऊर्जा विभाग की ओर से भी निर्बाध बिजली आपूर्ति और फॉल्ट होने पर त्वरित समाधान की बात कही जाती है।

लेकिन बेलघाट गाँव का मामला इन दावों की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक ट्रांसफॉर्मर चार दिन में भी नहीं बदला जा सकता, तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर चर्चा होना स्वाभाविक है।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि जल्द से जल्द नया ट्रांसफॉर्मर लगाया जाए और बिजली आपूर्ति बहाल की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

बस्ती जिले के बेलघाट गाँव में चार दिनों से जारी बिजली संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद बिजली बहाली में हो रही देरी और चंदा जुटाने के आरोपों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी जल्द हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान करेंगे।

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