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    Home»देश»‘भारत में नहीं चलेगा अमेरिका का कानून!’ Meta को केंद्र की दो टूक, PM मोदी वीडियो विवाद के बीच एल्गोरिदम पर मांगा जवाब
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    ‘भारत में नहीं चलेगा अमेरिका का कानून!’ Meta को केंद्र की दो टूक, PM मोदी वीडियो विवाद के बीच एल्गोरिदम पर मांगा जवाब

    sachin SinghBy sachin SinghAugust 6, 2026No Comments4 Mins Read
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    प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को हटाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta के सामने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में संचालन करने वाली किसी भी डिजिटल कंपनी को भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा और किसी दूसरे देश के नियम यहां लागू नहीं हो सकते।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, Meta की ग्लोबल टीम इन दिनों भारत में मौजूद है और भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकों में हिस्सा ले रही है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारतीय कानूनों के अनुपालन, कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम और सुरक्षा तंत्र को लेकर सरकार की चिंताओं का समाधान करना है।

    तीन-चार दिन तक भारत में रहेगी Meta की ग्लोबल टीम

    सूत्रों के मुताबिक, Meta की ग्लोबल टीम अगले कुछ दिनों तक भारत में रहेगी। इस दौरान कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे।

    बैठकों में केवल फेसबुक और इंस्टाग्राम ही नहीं बल्कि WhatsApp से जुड़े कई तकनीकी और नियामकीय मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

    सरकार चाहती है कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म देश के कानूनों और नियामकीय ढांचे का पूरी तरह पालन करें।

    एल्गोरिदम और कंटेंट मॉडरेशन पर सरकार के सवाल

    सरकार ने Meta से उसके एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया, पोस्ट हटाने के मानक और आंतरिक निगरानी प्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है।

    विशेष रूप से सरकार यह जानना चाहती है कि—

    • किस आधार पर कंटेंट हटाया जाता है।
    • भारतीय कानूनों को किस तरह लागू किया जाता है।
    • गलत निर्णयों की समीक्षा की क्या व्यवस्था है।
    • कंटेंट हटाने या सीमित करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है।
    • उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।

    डीपफेक और बाल सुरक्षा भी चर्चा का बड़ा मुद्दा

    बैठकों में केवल राजनीतिक कंटेंट ही नहीं बल्कि डिजिटल सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।

    सरकार ने Meta से पूछा है कि वह—

    • CSAM (Child Sexual Abuse Material) यानी बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान कैसे करता है।
    • Deepfake वीडियो और AI आधारित फर्जी कंटेंट को रोकने के लिए कौन-कौन सी तकनीक का उपयोग करता है।
    • ऐसे कंटेंट को हटाने और संबंधित एजेंसियों को सूचना देने की प्रक्रिया क्या है।

    सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी केवल कंटेंट उपलब्ध कराना नहीं बल्कि सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना भी है।

    IT मंत्री अश्विनी वैष्णव करेंगे अहम बैठक

    सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की Meta की ग्लोबल टीम के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है।

    इस दौरान भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कानूनों का पालन और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा होगी।

    मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी Meta की तकनीकी टीम के साथ अलग-अलग स्तर पर विस्तृत विचार-विमर्श कर रहे हैं।

    अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से भी लगातार संवाद

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, केवल Meta ही नहीं बल्कि X (पूर्व में Twitter), Telegram और अन्य प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के साथ भी सरकार लगातार संपर्क में है।

    सरकार का उद्देश्य सभी प्लेटफॉर्म पर समान नियम लागू करना और यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय कानूनों का पालन सभी कंपनियां समान रूप से करें।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी

    हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें, डीपफेक वीडियो, साइबर अपराध और भ्रामक सामग्री को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ी हैं।

    इसी कारण सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नियामकीय ढांचा और अधिक सख्त हो सकता है।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

    भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में शामिल है। करोड़ों लोग Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी भी कंटेंट मॉडरेशन निर्णय का व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।

    यही कारण है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय नागरिकों से जुड़े मामलों में अंतिम आधार भारतीय कानून ही हों, न कि किसी दूसरे देश की नीतियां।

    Meta और केंद्र सरकार के बीच जारी बातचीत केवल एक वीडियो विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, एल्गोरिदम की पारदर्शिता और कानूनों के अनुपालन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुकी है। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों के नतीजे भारत की डिजिटल नीति और सोशल मीडिया कंपनियों के संचालन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

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    sachin Singh

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