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    Home»देश»चीन-जापान को मिलेगी कड़ी टक्कर? ₹10,000 करोड़ के मेगा निवेश के साथ जहाज निर्माण में उतरा Tata Group, भारत के लिए खुला नया अध्याय
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    चीन-जापान को मिलेगी कड़ी टक्कर? ₹10,000 करोड़ के मेगा निवेश के साथ जहाज निर्माण में उतरा Tata Group, भारत के लिए खुला नया अध्याय

    sachin SinghBy sachin SinghJuly 16, 2026No Comments4 Mins Read
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    भारत: के औद्योगिक विकास की दिशा में एक और बड़ा कदम उठने जा रहा है। देश का प्रमुख औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप अब कमर्शियल शिपबिल्डिंग यानी जहाज निर्माण उद्योग में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत समूह केरल में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश कर अत्याधुनिक जहाज निर्माण सुविधा स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।

    यदि यह परियोजना तय समय पर साकार होती है, तो इससे न केवल केरल की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।

    केरल बनेगा नया समुद्री औद्योगिक केंद्र

    राज्य सरकार के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना पर टाटा समूह के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी निवेश के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने और सभी प्रशासनिक सहयोग का भरोसा भी दिया है।

    यह परियोजना राज्य सरकार के ‘मिशन समुद्र’ कार्यक्रम का अहम हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य बंदरगाह आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और बड़े घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित करना है।

    MSC के निवेश के बाद एक और बड़ा कदम

    हाल ही में वैश्विक शिपिंग कंपनी MSC ने भी केरल के विझिनजाम बंदरगाह में लगभग 13,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया था। इसे भारत के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़े निजी विदेशी निवेशों में से एक माना जा रहा है।

    अब टाटा समूह का प्रस्ताव सामने आने से केरल तेजी से समुद्री उद्योग और लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    पहली बार कमर्शियल शिपबिल्डिंग में टाटा की एंट्री

    यह परियोजना टाटा समूह के लिए भी एक नया अध्याय साबित हो सकती है। समूह पहली बार बड़े पैमाने पर कमर्शियल जहाज निर्माण उद्योग में उतरने जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इससे टाटा स्टील को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि कंपनी पहले से जहाज निर्माण में उपयोग होने वाले विशेष स्टील की प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। इससे कच्चे माल से लेकर तैयार जहाज तक एक मजबूत औद्योगिक श्रृंखला विकसित होने की संभावना बढ़ेगी।

    भारत क्यों बढ़ा रहा है जहाज निर्माण पर फोकस?

    भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य निर्धारित किया है। फिलहाल वैश्विक शिपबिल्डिंग बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 1 प्रतिशत के आसपास बताई जाती है, जबकि चीन, दक्षिण कोरिया और जापान इस क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी हैं।

    ऐसे में यदि बड़े भारतीय औद्योगिक समूह इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाते हैं तो घरेलू उत्पादन क्षमता, तकनीकी विकास और निर्यात को भी नई गति मिल सकती है।

    रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

    विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना के शुरू होने से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा स्टील, इंजीनियरिंग, भारी मशीनरी, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट सेवाओं और समुद्री परिवहन से जुड़े अनेक उद्योगों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

    इससे स्थानीय उद्योगों के साथ-साथ भारत के विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिल सकती है।

    भारत की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ता प्रयास

    इतिहासकारों के अनुसार, 18वीं शताब्दी में भारत जहाज निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता था और यहां बने कई जहाज अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उपयोग किए जाते थे। आधुनिक दौर में यह क्षेत्र सीमित रह गया, लेकिन अब सरकार और निजी उद्योगों के संयुक्त प्रयास से इसे फिर से विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को तकनीक, दक्ष मानव संसाधन, वैश्विक गुणवत्ता मानकों और बड़े निवेश पर लगातार काम करना होगा।

    केरल में प्रस्तावित 10,000 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग परियोजना भारत के समुद्री और विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यदि यह परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे रोजगार, औद्योगिक विकास और जहाज निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। हालांकि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी क्षमता का विस्तार भी उतना ही आवश्यक होगा।

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