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राहुल गांधी जिंदाबाद’ बोलते ही रुका शपथ समारोह! तमिलनाडु में कांग्रेस विधायक को गवर्नर ने टोका

तमिलनाडु: की राजनीति में गुरुवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब मुख्यमंत्री विजय की कैबिनेट विस्तार समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार ने शपथ लेते समय “जननायक राहुल गांधी जिंदाबाद” के नारे लगा दिए। यह घटनाक्रम देखते ही राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें बीच में टोकते हुए कहा, “यह आपकी शपथ का हिस्सा नहीं है।”

इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विजय सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 23 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें कांग्रेस के दो विधायक भी शामिल थे।

शपथ समारोह के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस विधायक दल के नेता और किलियूर सीट से विधायक एस. राजेश कुमार की रही। उन्होंने शपथ लेते समय “कामराज अमर रहें”, “भारत रत्न राजीव गांधी अमर रहें” और “जननायक राहुल गांधी जिंदाबाद” के नारे लगाए। गवर्नर ने मुस्कुराते हुए उन्हें टोका और कहा कि यह शपथ का हिस्सा नहीं है। इसके बाद राजेश कुमार भी मुस्कुराए और हस्ताक्षर करने चले गए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस की सक्रिय भूमिका का संकेत हो सकती है। क्योंकि कांग्रेस लगभग 59 साल बाद तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनी है। इससे पहले 1952 से 1967 तक कांग्रेस की सरकार मद्रास राज्य में रही थी। बाद में DMK और AIADMK के दौर में कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा तो रही, लेकिन सत्ता में शामिल नहीं हुई।

शपथ समारोह में दूसरा बड़ा विवाद “तमिल थाई वाझ्थु” यानी तमिलनाडु के राज्य गीत को लेकर हुआ। परंपरा के अनुसार राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में यह गीत सबसे पहले बजाया जाता रहा है। लेकिन इस बार समारोह की शुरुआत “वंदे मातरम” और राष्ट्रगान “जन गण मन” से हुई, जबकि “तमिल थाई वाझ्थु” सबसे आखिर में बजाया गया।

इस बदलाव को लेकर विपक्ष और तमिल संगठनों ने नाराजगी जताई। इससे पहले 10 मई को मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी यही क्रम अपनाया गया था, जिस पर विवाद हुआ था। बाद में विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने सफाई देते हुए कहा था कि यह केंद्र सरकार के एक सर्कुलर के कारण हुआ और भविष्य में तमिल गीत को पहले बजाया जाएगा।

दरअसल, अभिनेता से राजनेता बने विजय ने हाल ही में राजनीति में बड़ी एंट्री की है। उनकी पार्टी TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया। इसके बाद विजय ने सरकार बनाई और 8 मई को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट भी पास कर लिया।

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फ्लोर टेस्ट के दौरान TVK सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला था, जबकि बहुमत के लिए 118 वोटों की जरूरत थी। AIADMK के 25 बागी विधायकों ने भी विजय सरकार के पक्ष में मतदान किया। वहीं DMK ने वोटिंग से पहले वॉकआउट कर दिया था।

10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय विजय खुद भी विवादों में घिर गए थे। उन्होंने निर्धारित शपथ के अलावा अतिरिक्त बातें बोलनी शुरू कर दी थीं, जिस पर गवर्नर अर्लेकर ने उन्हें टोका था। इसके बाद विजय ने लिखित शपथ पत्र पढ़ा।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विजय की राजनीति लगातार प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। तमिल पहचान, युवा राजनीति और क्षेत्रीय भावनाओं को केंद्र में रखकर TVK अपनी अलग पहचान बनाने में जुटी है।

इस बीच असम विधानसभा में भी इसी तरह का मामला सामने आया, जहां TMC विधायक शर्मन अली अहमद ने शपथ लेते समय “ममता दीदी जिंदाबाद” के नारे लगाए। उन्होंने बाद में कहा कि ममता बनर्जी के समर्थन को देखते हुए उनका नाम लेना उनका फर्ज था।

तमिलनाडु में हुए इन विवादों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या संवैधानिक शपथ के दौरान राजनीतिक नारे और व्यक्तिगत विचार व्यक्त किए जाने चाहिए या नहीं। विपक्षी दल जहां इसे राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, वहीं कुछ संवैधानिक विशेषज्ञ इसे शपथ की गरिमा के खिलाफ मान रहे हैं।

तमिलनाडु में विजय सरकार के कैबिनेट विस्तार समारोह ने शपथ से ज्यादा विवादों के कारण सुर्खियां बटोरीं। कांग्रेस विधायक के “राहुल गांधी जिंदाबाद” नारे और “तमिल थाई वाझ्थु” को लेकर उठे विवाद ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।

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