उत्तर प्रदेश के खेकड़ा क्षेत्र से एक बेहद शर्मनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। यहां एक बेटे ने शराब के नशे में अपनी ही बुजुर्ग मां के साथ दुष्कर्म कर डाला। इतना ही नहीं, उसने अपनी मां को जान से मारने की धमकी देकर चार महीने तक चुप रहने के लिए मजबूर किया।
यह मामला तब उजागर हुआ जब आरोपी ने दूसरी बार भी वही घिनौनी हरकत करने की कोशिश की। इस बार पीड़ित महिला ने हिम्मत जुटाई और पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया।
चार महीने पहले हुआ था पहला अपराध
पीड़ित 60 वर्षीय महिला ने पुलिस को बताया कि उसका बेटा जितेंद्र, जो पहले से विवाहित है, दिसंबर 2025 में अपनी पत्नी के मायके जाने के बाद घर में अकेला रहता था। इसी दौरान वह शराब के नशे में घर आया और अपनी मां के साथ जबरदस्ती की।
महिला ने आरोप लगाया कि उस रात बेटे ने उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। परिवार की इज्जत और डर के कारण महिला ने उस समय यह बात किसी को नहीं बताई।

दूसरी बार कोशिश, तब टूटी चुप्पी
घटना के करीब चार महीने बाद, बृहस्पतिवार शाम को आरोपी फिर से नशे में घर पहुंचा और अपनी मां के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश करने लगा।
जब महिला ने विरोध किया तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की, जिससे वह घायल हो गई। इस बार महिला ने साहस दिखाते हुए तुरंत पुलिस को कॉल किया और पूरी घटना की जानकारी दी।
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी बेटे जितेंद्र को हिरासत में ले लिया। पीड़िता के बयान कोर्ट में दर्ज कराए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
परिवार और समाज में मचा आक्रोश
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया है। स्थानीय लोग इस घटना को लेकर हैरान और गुस्से में हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज के लिए बेहद चिंताजनक हैं और ऐसे आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
यह मामला न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों के विश्वास को भी तोड़ने वाला है।
विशेषज्ञों की राय
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर मानसिक असंतुलन, नशे की लत और सामाजिक विकृतियां बड़ी भूमिका निभाती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के मामलों में पीड़ित अक्सर डर और सामाजिक दबाव के कारण चुप रहते हैं, जिससे अपराधी को बढ़ावा मिलता है।
महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा के मुद्दे को उजागर कर दिया है। यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या महिलाएं अपने ही घर में सुरक्षित हैं?
सरकार और प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाने की जरूरत है, ताकि पीड़ित बिना डर के सामने आ सकें।
खेकड़ा का यह मामला समाज के लिए एक कड़वी सच्चाई सामने लाता है, जहां रिश्तों की मर्यादा भी अपराध के आगे टूट जाती है। हालांकि पीड़िता ने साहस दिखाकर न्याय की दिशा में कदम बढ़ाया है, लेकिन यह घटना बताती है कि अभी भी समाज में जागरूकता और सख्त कानून लागू करने की जरूरत है।