राजधानी: दिल्ली के चर्चित कथित शराब घोटाला मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Arvind Kejriwal सोमवार को Delhi High Court में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण बयान दिए। इस मामले में अदालत ने Central Bureau of Investigation (CBI) की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिससे इस पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।
यह मामला दिल्ली की पूर्व आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें कथित अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है। CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर अब हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।
सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में अपना पक्ष स्वयं रखेंगे। उन्होंने अदालत में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग भी की। हालांकि, अदालत ने उनकी इस अर्जी को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख तय कर दी है।
सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि वह कोर्ट में ही अपनी बात विस्तार से रखेंगे। उनका यह रुख साफ तौर पर यह संकेत देता है कि आने वाली सुनवाई में वह सक्रिय रूप से अपनी पैरवी करेंगे।
वहीं, CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने केजरीवाल की अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे तुच्छ और न्यायालय की अवमानना के समान बताया। मेहता ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले में बरी किए गए अन्य सात आरोपियों ने भी जज को हटाने की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस पर कहा कि यदि अन्य आरोपी भी कोई अर्जी देना चाहते हैं तो वे दे सकते हैं, ताकि सभी आवेदनों पर एक साथ विचार किया जा सके। इससे यह संकेत मिलता है कि अदालत इस मामले को व्यापक रूप से और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए सुनना चाहती है।
इससे पहले 27 फरवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल, Manish Sisodia और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में CBI की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा था कि प्रस्तुत साक्ष्य न्यायिक परीक्षण में टिकने योग्य नहीं हैं और मामला अविश्वसनीय प्रतीत होता है।
हालांकि, 9 मार्च को हाईकोर्ट ने CBI की अपील पर सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया था और निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने संकेत दिया था कि आरोप तय करने के चरण में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां त्रुटिपूर्ण हो सकती हैं।
इस बीच, D. K. Upadhyaya ने केजरीवाल की उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने जज को बदलने की अपील की थी। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि किसी जज को हटाने का निर्णय उसी जज के विवेक पर निर्भर करता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर हलचल मचा दी है। एक ओर जहां आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, वहीं विपक्ष इस मामले को भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बता रहा है।
अब सभी की नजरें 13 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। यह सुनवाई न केवल इस केस की दिशा तय करेगी, बल्कि दिल्ली की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।
दिल्ली शराब घोटाला मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हाईकोर्ट की अगली सुनवाई इस केस में निर्णायक साबित हो सकती है। केजरीवाल का खुद अपनी पैरवी करना इस मामले को और भी दिलचस्प बना रहा है।