उत्तर प्रदेश: के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए अपने बयान से राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में बोलते हुए उन्होंने ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और भारतीय संस्कृति को लेकर कई तीखे और विवादित बयान दिए।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि “सालार मसूद, जिसे गाजी मियां कहा जाता है, वह माफिया जैसा था।” उन्होंने दावा किया कि महाराजा Maharaja Suheldev ने उसे ऐसी सजा दी थी, जिससे वह “जहन्नुम पहुंच गया।” योगी के इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है।
इतिहास के जरिए संदेश देने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में एक हजार साल पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि महाराजा सुहेलदेव का शौर्य आज की पीढ़ी को जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ न केवल लड़ाई लड़ी, बल्कि उन्हें कड़ी सजा देकर यह संदेश दिया कि भारत की संस्कृति पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
योगी ने यह भी कहा कि समाज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह अपने नायकों को पहचानने और सम्मान देने में पीछे रह जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में “खलनायकों को नायक के रूप में पेश किया गया,” जिससे समाज में गलत संदेश गया।
सांस्कृतिक विरासत और सिनेमा पर टिप्पणी
अपने भाषण के दौरान योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब फिल्मों और संस्थानों में ऐसे लोगों का प्रभाव था, जो “माफिया और अपराधियों को हीरो के रूप में दिखाते थे।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि Ramayan दुनिया का सबसे लोकप्रिय धारावाहिक है और यह भारतीय समाज की भावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज सिनेमा धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मेला और स्मारक का जिक्र
सीएम योगी ने बहराइच का जिक्र करते हुए कहा कि जहां महाराजा सुहेलदेव ने सालार मसूद को हराया था, वहां लंबे समय तक उसके नाम पर मेला लगता रहा। उन्होंने इसे “गुलामी की मानसिकता” बताया और कहा कि उनकी सरकार ने सुहेलदेव के सम्मान में स्मारक बनवाया।
उन्होंने दावा किया कि अब लोगों की सोच बदल रही है और वे अपने असली नायकों को पहचानने लगे हैं। “अब भीड़ सुहेलदेव के स्मारक पर जाती है,” उन्होंने कहा।
महिला वीरांगनाओं का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वीरांगना अवंतीबाई, झलकारी बाई और ऊदा देवी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पर नाटक, संगीत और फिल्में बननी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उन्हें अपना आदर्श बना सके।
उन्होंने भारतेंदु नाट्य अकादमी से अपील की कि वह ऐसे विषयों पर लघु नाटक तैयार करे, जिससे समाज में जागरूकता बढ़े और बच्चों को सही इतिहास की जानकारी मिल सके।
सरकार और संवेदनशीलता पर बयान
कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब सरकार संवेदनशील होती है, तो वह हर संकट से लड़ने की क्षमता रखती है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल में पड़े अकाल और स्पेनिश फ्लू का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय सरकार ने जनता की पीड़ा को नजरअंदाज किया।
इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने महामारी के दौरान लोगों की मदद के लिए हर संभव प्रयास किए।
लखनऊ में दिए गए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस भाषण ने इतिहास, संस्कृति और राजनीति को एक साथ जोड़ते हुए नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर समर्थक इसे सांस्कृतिक जागरूकता का प्रयास मान रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे विवादास्पद और विभाजनकारी बयान बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है।