चिराग पासवान का खास बयान: ‘आज राजनीति नहीं, पिता की याद का दिन

पटना, बिहार: चिराग पासवान का भावुक बयान — पिता को याद करते हुए
पटना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने एक भावुक बयान दिया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उस दिन राजनीति या राजनीतिक मामलों में नहीं सोच रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज मेरे लिए राजनीति या राजनीतिक मामलों से जुड़ा दिन नहीं है। यह दिन पूरी तरह से और केवल मेरे और मेरे परिवार के लिए मेरे पिता की यादों से जुड़ा हुआ है।”
चिराग पासवान का यह बयान उनके पिता चिराग पासवान के राजनीतिक मार्गदर्शक और जनसेवा के आदर्श रहे लोजपा नेता रामविलास पासवान की याद में था। रामविलास पासवान का बिहार और देश की राजनीति में योगदान अमूल्य रहा है। उन्होंने गरीब, मजदूर और पिछड़े वर्ग के हित में लगातार संघर्ष किया और उनकी सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। चिराग ने अपने भाषण में कहा कि उनके पिता का व्यक्तित्व, उनके आदर्श और उनका जीवन दर्शन उनकी राजनीति की नींव है।
चिराग ने कहा कि पिता की शिक्षा और उनका मार्गदर्शन उनके जीवन का सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने याद किया कि कैसे रामविलास पासवान ने बिहार के हर नागरिक के लिए एक बेहतर भविष्य के निर्माण में खुद को समर्पित कर दिया। चिराग ने यह भी कहा कि राजनीति में पिता ने जो संघर्ष और निष्ठा दिखाई, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
अपने भावुक भाषण में चिराग ने यह भी कहा कि आज के दिन वह केवल अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं। यह दिन उनके लिए व्यक्तिगत है — पिता की यादों, उनके विचारों और उनके आदर्शों को सम्मान देने का दिन। उन्होंने कहा कि राजनीति के उतार-चढ़ाव में भी परिवार और मूल्यों की अहमियत सबसे ऊपर रहती है।
चिराग पासवान के इस बयान ने उनके समर्थकों और राजनीतिक circles में गहरी छाप छोड़ी है। यह बयान न केवल उनके पिता के प्रति श्रद्धांजलि है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि चिराग अपनी राजनीति में पिता के आदर्शों को किस तरह से आगे ले जाने का संकल्प रखते हैं।
बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान का योगदान और उनकी विरासत आज भी जीवित है। चिराग पासवान का यह भावुक बयान उनके राजनीतिक करियर का एक ऐसा पल है, जो उनके जीवन और राजनीति को समझने में एक नई दिशा देता है। यह बयान याद दिलाता है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं है, बल्कि इसमें मूल्यों, आदर्शों और सेवा की भावना का गहरा स्थान होता है।
चिराग पासवान ने अंत में यह भी कहा कि वे अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उनका यह बयान न केवल एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि है, बल्कि बिहार और देश के सामने यह संदेश भी है कि राजनीति में आदर्शों और मूल्यों का स्थान कभी कम नहीं होना चाहिए।