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धर्म और सांप्रदायिकता: मांझी के तीखे बयान के पीछे क्या है सच?

मांझी का विवादित बयान: क्या ‘आई लव मोहम्मद’ में छुपी है सांप्रदायिकता?

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू नेता जीतन राम मांझी ने हाल ही में एक विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने फिल्म ‘आई लव मोहम्मद’ और उससे फैल रही सांप्रदायिकता की आलोचना की है। मांझी ने कहा कि इस फिल्म से जो सांप्रदायिकता की बदबू फैल रही है, वह समाज के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि धर्म का असली मतलब इंसान बनना और इंसानियत को बढ़ावा देना है, न कि किसी भी तरह की कट्टरता और दंगों को बढ़ावा देना।

मांझी का यह बयान आज के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में काफी महत्वपूर्ण है, जहां कई बार धार्मिक भावनाओं का गलत इस्तेमाल किया जाता है। उनकी बात इस दिशा में एक गंभीर चेतावनी है कि यदि हम धर्म को केवल पाखंड, नफरत और अलगाव की दृष्टि से देखें तो यह समाज के लिए विनाशकारी साबित होगा। मांझी ने यह स्पष्ट किया कि धर्म का मूल उद्देश्य मानवता की सेवा, प्रेम, और सहिष्णुता को बढ़ावा देना है, न कि समाज को बांटना या द्वेष फैलाना।

‘आई लव मोहम्मद’ फिल्म पर मांझी की प्रतिक्रिया
फिल्म ‘आई लव मोहम्मद’ के जरिये कथित तौर पर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने की बात मांझी ने कही। उनका मानना है कि ऐसी चीजें समाज में तनाव, डर और अविश्वास की भावना पैदा करती हैं, जिससे सामाजिक समरसता को बड़ा नुकसान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के हर वर्ग को इस तरह के विवादों से दूर रहकर एक-दूसरे की संस्कृति, आस्था और विचारों का सम्मान करना चाहिए।

धर्म का वास्तविक अर्थ
मांझी ने धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि धर्म का वास्तविक मतलब है इंसान होना और इंसानियत को समझना। धर्म केवल पूजा-पाठ, रीतिरिवाज या अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार, सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी का नाम है। धर्म हमें यह सिखाता है कि हमें अपने से कमजोरों की मदद करनी चाहिए, प्रेम और सहिष्णुता से रहना चाहिए, और एक-दूसरे के विश्वास का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर धर्म के नाम पर हम एक-दूसरे को तोड़ेंगे, नफरत फैलाएंगे और हिंसा को बढ़ावा देंगे, तो इसका कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। धर्म का असली मकसद इंसानियत को संजोना और उसे बेहतर बनाना है।” मांझी ने यह भी कहा कि आज का सभ्य समाज ऐसे गलतफहमियों और सांप्रदायिकता की जड़ को साफ करने के लिए सजग होना चाहिए।

सामाजिक समरसता के लिए जरूरी है सहिष्णुता
मांझी ने यह भी जोर दिया कि भारत जैसा बहुलवादी देश तभी मजबूत और सुरक्षित रहेगा, जब हर धर्म, जाति और समुदाय के लोग एक-दूसरे के साथ प्रेम और सम्मान से रहेंगे। वे आगे कहते हैं कि सांप्रदायिकता के बीज बोने वाले हमेशा समाज को कमजोर करने की कोशिश करते हैं, इसलिए हमें उनसे सावधान रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सही मायनों में धर्म का संदेश यह है कि हम सभी इंसान एक हैं और हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए, न कि एक-दूसरे से लड़ना। सांप्रदायिकता की बदबू फैलाने वाली हर चीज का मुकाबला करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

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