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होमगार्ड भर्ती का पेपर बना ‘IAS-PCS लेवल’: 25 लाख अभ्यर्थी हैरान, बोले- “नौकरी नहीं मिलती, इसलिए देना पड़ा एग्जाम”

उत्तर प्रदेश: में 42 हजार होमगार्ड पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा ने पहले ही दिन विवाद और चर्चा का माहौल बना दिया है। प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ समेत प्रदेश के 1053 केंद्रों पर शनिवार से शुरू हुई इस परीक्षा में करीब 25 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने का अनुमान है। लेकिन परीक्षा देकर बाहर निकले उम्मीदवारों की प्रतिक्रियाएं चौंकाने वाली रहीं। कई अभ्यर्थियों ने पेपर को “IAS-PCS लेवल” का बताते हुए इसकी कठिनाई पर सवाल खड़े किए।

परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई, जिसमें 100 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए। परीक्षा का समय 2 घंटे रखा गया था और इसमें नेगेटिव मार्किंग नहीं थी। हालांकि, उम्मीदवारों का कहना है कि प्रश्नों का स्तर अपेक्षा से कहीं ज्यादा कठिन था।

आजमगढ़ के अभ्यर्थी उमेश ने कहा, “पेपर इतना कठिन था कि लग रहा था जैसे UPSC या PCS का एग्जाम दे रहे हों। अगर इतना ही कठिन पेपर देना था, तो लिखित परीक्षा के बजाय दौड़ या फिजिकल टेस्ट ही करवा लेते।” इसी तरह कानपुर से झांसी पहुंचे त्रिवेंद्र सिंह ने अपनी निराशा जताते हुए कहा, “मैं बेरोजगारी से परेशान हूं, इसलिए यह परीक्षा देने आया हूं। लेकिन पेपर देखकर लगा कि यह हमारे स्तर से काफी ऊपर है।”

इस परीक्षा में बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित अभ्यर्थी शामिल हुए। MA, BA, B.Ed, CTET और ITI पास उम्मीदवार भी इस भर्ती के लिए परीक्षा देने पहुंचे। कुशीनगर की शशिबाला, जो B.Ed और CTET क्वालीफाई कर चुकी हैं, ने बताया कि “टीचिंग लाइन में वैकेंसी नहीं आ रही, इसलिए मजबूरी में होमगार्ड भर्ती के लिए आवेदन करना पड़ा।”

परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद सख्त रही। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले रेटिना स्कैन और बायोमेट्रिक जांच से गुजरना पड़ा। कई जिलों में सख्ती इतनी अधिक थी कि जौनपुर में उम्मीदवारों के जूते उतरवाए गए, जबकि संभल में कलावा, बेल्ट, कंगन और ताबीज तक उतरवा दिए गए। हालांकि, पहले ही निर्देश दिए गए थे कि धार्मिक प्रतीकों को न हटवाया जाए, फिर भी कई जगह इस नियम का पालन नहीं हुआ।

प्रतापगढ़ के आलोक सरोज ने कहा कि पेपर “ठीक-ठाक” था, लेकिन कई विषयों से सवाल कम आए। उन्होंने बताया कि “जियोग्राफी के प्रश्न लगभग नहीं थे और हिस्ट्री से भी बहुत कम सवाल पूछे गए।” वहीं मिर्जापुर के अंबुज पांडेय, जो पहले से नौकरी कर रहे हैं, ने कहा कि “सरकारी नौकरी की स्थिरता के कारण मैंने यह परीक्षा दी।”

इस भर्ती परीक्षा का आयोजन 27 अप्रैल तक चलेगा और तीन दिनों में कुल 25 लाख अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा को देखते हुए प्रदेश भर में पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

इस बीच, अभ्यर्थियों की प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर राज्य में बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं की जटिलता को उजागर किया है। बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित युवाओं का होमगार्ड जैसी नौकरियों के लिए आवेदन करना इस बात का संकेत है कि रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं का स्तर उम्मीदवारों की योग्यता और पद की आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए। यदि पेपर अत्यधिक कठिन होगा, तो इससे योग्य उम्मीदवार भी पीछे रह सकते हैं और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

होमगार्ड भर्ती परीक्षा 2026 ने न केवल अपने पैमाने बल्कि पेपर की कठिनाई के कारण भी चर्चा बटोरी है। अभ्यर्थियों की नाराजगी इस बात की ओर इशारा करती है कि भर्ती प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में परीक्षा के अन्य चरणों और परिणामों पर सभी की नजर रहेगी।

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