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₹10,000 से ज्यादा पेमेंट पर लगेगा ‘ब्रेक’! 1 घंटे का होल्ड और किल स्विच से बदल जाएगा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन

देश: में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन के बीच अब सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत ₹10,000 से ज्यादा के ऑनलाइन पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड लगाया जा सकता है। इसका मकसद डिजिटल फ्रॉड को रोकना और यूजर्स को गलत ट्रांजैक्शन को कैंसिल करने का समय देना है।

आज के समय में UPI और अन्य डिजिटल माध्यमों से पैसे ट्रांसफर करना बेहद आसान और तेज हो गया है। लेकिन इसी तेजी का फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों को झांसे में लेकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। ऐसे मामलों में यूजर्स के पास सोचने या गलती सुधारने का मौका नहीं होता। RBI का यह प्रस्ताव इसी समस्या का समाधान निकालने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है 1 घंटे का होल्ड नियम?

RBI के प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई यूजर ₹10,000 से अधिक का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करता है, तो वह तुरंत प्रोसेस नहीं होगा। इसके बजाय उस ट्रांजैक्शन को 1 घंटे तक होल्ड पर रखा जाएगा।

इस दौरान यूजर के पास यह विकल्प होगा कि वह ट्रांजैक्शन को रिव्यू करे और यदि कोई गलती या संदेह लगे तो उसे कैंसिल कर सके। यह फीचर खासकर उन मामलों में मददगार होगा, जहां ठग मानसिक दबाव बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

सीनियर सिटीजंस के लिए अतिरिक्त सुरक्षा

RBI ने बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए एक और महत्वपूर्ण सुविधा का सुझाव दिया है। इसके तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए ₹50,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर ‘ट्रस्टेड पर्सन’ की मंजूरी अनिवार्य हो सकती है।

यह ट्रस्टेड पर्सन कोई परिवार का सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति हो सकता है, जिसकी अनुमति के बिना बड़ा ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होगा। इससे वरिष्ठ नागरिकों को साइबर फ्रॉड से अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी।

व्हाइटलिस्ट फीचर से मिलेगी राहत

नई व्यवस्था में ‘व्हाइटलिस्ट’ फीचर भी शामिल किया जा सकता है। इसके तहत यूजर अपने भरोसेमंद लोगों या मर्चेंट्स को पहले से सूची में जोड़ सकेंगे।

यदि ट्रांजैक्शन व्हाइटलिस्टेड व्यक्ति को किया जाता है, तो उस पर 1 घंटे का होल्ड लागू नहीं होगा। इससे रोजमर्रा के लेन-देन में कोई परेशानी नहीं आएगी और सिस्टम भी संतुलित रहेगा।

‘किल स्विच’ से तुरंत बंद होंगे पेमेंट

RBI ने एक और अहम फीचर ‘किल स्विच’ का सुझाव दिया है। यह फीचर यूजर्स को अपने सभी डिजिटल पेमेंट माध्यमों को एक क्लिक में बंद करने की सुविधा देगा।

अगर किसी को लगे कि उसका अकाउंट हैक हो गया है या कोई संदिग्ध गतिविधि हो रही है, तो वह तुरंत अपने UPI, नेट बैंकिंग और अन्य सेवाओं को बंद कर सकेगा। इससे बड़े नुकसान से बचा जा सकेगा।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में डिजिटल धोखाधड़ी से होने वाला नुकसान 22,000 करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है।

दिलचस्प बात यह है कि ₹10,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल मामलों का केवल 45% हैं, लेकिन कुल फ्रॉड राशि में इनकी हिस्सेदारी 98.5% तक है। यही वजह है कि RBI ने इस लिमिट को तय करने का सुझाव दिया है।

कब लागू होंगे ये नियम?

फिलहाल RBI इस प्रस्ताव पर बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ चर्चा कर रहा है। तकनीकी स्तर पर इसे लागू करना एक चुनौती है, क्योंकि डिजिटल पेमेंट की गति और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

संभावना है कि अगले कुछ महीनों में इस पर अंतिम गाइडलाइन जारी की जाएगी और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

एक्सपर्ट्स की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूजर्स की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि इससे कुछ लोगों को ट्रांजैक्शन में देरी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में यह सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाएगा।

RBI का यह प्रस्ताव डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 1 घंटे का होल्ड, ट्रस्टेड पर्सन और किल स्विच जैसे फीचर्स यूजर्स को फ्रॉड से बचाने में मदद करेंगे। हालांकि इससे स्पीड पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह बदलाव बेहद अहम साबित हो सकता है।

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