पश्चिम बंगाल: की सियासत में चुनावी गर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। गुरुवार को आसनसोल और हल्दिया में आयोजित जनसभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और विकास को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
आसनसोल की रैली में पीएम मोदी ने कहा कि “4 मई के बाद बंगाल में हर गुंडागर्दी का हिसाब लिया जाएगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि TMC ने जनता के विश्वास को तोड़ा है और राज्य में “निर्ममता की सारी हदें पार कर दी हैं।”
उन्होंने आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश की आय में बंगाल का योगदान घटकर सिर्फ 5 से 6.5 प्रतिशत रह गया है, जबकि आम लोगों की आय लगातार कम हो रही है। इसके उलट TMC नेताओं की संपत्ति और जीवनशैली में लगातार इजाफा हो रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि अब बंगाल में “TMC का भय नहीं, भाजपा का भरोसा” चलेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे राज्य में बदलाव के लिए भारतीय जनता पार्टी को मौका दें।
इससे पहले हल्दिया में आयोजित जनसभा में भी प्रधानमंत्री ने TMC सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ “डबल धोखा” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में प्राइवेट सेक्टर लगभग खत्म हो चुका है और रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं।

विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए मोदी ने कांग्रेस और वामपंथी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस और लेफ्ट एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं” और इन सभी पार्टियों ने दशकों तक बंगाल को केवल नुकसान पहुंचाया है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और TMC के “गुंडों” को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
पीएम मोदी ने बंगाल के विकास के लिए छह प्रमुख गारंटियों की भी घोषणा की। इनमें कानून का राज स्थापित करना, भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई, सरकारी सिस्टम को जवाबदेह बनाना, शरणार्थियों को सम्मान और सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू करना शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में “डबल इंजन सरकार” बनने से विकास परियोजनाओं को तेजी मिलेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा शासित राज्यों में मत्स्य पालन और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है, जबकि बंगाल इस क्षेत्र में पिछड़ गया है।
राजनीतिक दृष्टि से हल्दिया और आसनसोल दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हल्दिया को विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का मजबूत क्षेत्र माना जाता है, जबकि बीरभूम TMC का गढ़ रहा है। भाजपा इन इलाकों में एंटी-इनकंबेंसी का फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।
इसी बीच, एक भावनात्मक बयान भी चर्चा में रहा। आरजी कर अस्पताल केस की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने कहा कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, वे अपने बालों में कंघी नहीं करेंगी। वे भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
दूसरी ओर, असम में भी चुनावी हलचल तेज रही, जहां मतदान से एक दिन पहले कांग्रेस उम्मीदवार सुरेन दैमारी के पार्टी छोड़ने की खबर सामने आई। हालांकि उनका नाम ईवीएम में बना रहेगा।
कुल मिलाकर, बंगाल में चुनावी माहौल बेहद गरमाया हुआ है और सभी पार्टियां अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे सत्ता की कमान सौंपती है।
प्रधानमंत्री मोदी के तीखे हमलों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया है। TMC पर लगाए गए आरोप और भाजपा की गारंटियों ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब फैसला जनता के हाथ में है, जो तय करेगी कि राज्य में बदलाव होगा या वर्तमान सरकार को फिर मौका मिलेगा।