उत्तर प्रदेश: की राजधानी Lucknow में बुधवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर माहौल गरमाता नजर आया। सवर्ण मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी सीएम Brajesh Pathak के आवास के बाहर शंख बजाकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस वक्त अलग हो गया, जब शंखध्वनि और नारों के बीच खुद डिप्टी सीएम हाथ जोड़कर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने झुककर अभिवादन किया, जिसका जवाब प्रदर्शनकारियों ने भी सम्मानपूर्वक दिया। इसके बाद उन्होंने सभी को अंदर बुलाकर बातचीत की, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति शांत हो गई।

शंख बजाकर जताया विरोध
सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने UGC के नए नियमों को “काला कानून” बताते हुए विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ हैं और इससे उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है।
प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी के साथ शंख बजाए गए, जो इस विरोध का प्रमुख प्रतीक बना। बड़ी संख्या में लोग डिप्टी सीएम आवास के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जाहिर किया।
डिप्टी सीएम का अनोखा अंदाज
विरोध के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का शांत और विनम्र रवैया चर्चा का विषय बन गया। वे खुद प्रदर्शनकारियों के पास पहुंचे और कमर तक झुककर हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने दरवाजा खोलकर सभी को अंदर बुलाया और बैठकर बातचीत की।
यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए चौंकाने वाला भी था और सराहनीय भी। आमतौर पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान टकराव की स्थिति बनती है, लेकिन यहां संवाद के जरिए मामला शांत होता नजर आया।
प्रदर्शनकारियों के सवाल और आरोप
बैठक के दौरान सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों—संदीप सिंह, पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी और बसंत सिंह बघेल—ने डिप्टी सीएम से सवाल किया कि आखिर ऐसे नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी।
उनका आरोप था कि यह नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ एक “कुचक्र” है। उन्होंने कहा कि यदि कोई फर्जी मामला दर्ज होता है, तो इससे छात्रों का भविष्य बर्बाद हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक यह नियम पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा।
डिप्टी सीएम का आश्वासन
प्रदर्शनकारियों की बात सुनने के बाद ब्रजेश पाठक ने आश्वासन दिया कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सामान्य वर्ग से आते हैं और इस मुद्दे को गंभीरता से समझते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय को दिल्ली के नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा और समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उनके इस आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने फिलहाल अपना विरोध समाप्त कर दिया।
राजनीतिक और सामाजिक असर
यह विरोध केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी देखा जा सकता है। शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर इस तरह का विरोध यह दर्शाता है कि नए नियमों को लेकर समाज के एक वर्ग में असंतोष है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सरकार और संबंधित संस्थाओं को सभी पक्षों की बात सुनकर संतुलित समाधान निकालना चाहिए।
लखनऊ में UGC के नए नियमों के विरोध में हुआ यह प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण संकेत है कि शिक्षा नीतियों पर समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का संवाद का तरीका भले ही स्थिति को शांत करने में सफल रहा, लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।