लखनऊ: के मड़ियांव इलाके से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सोशल मीडिया के लिए रील बनाना एक युवक की जान पर भारी पड़ गया। 18 वर्षीय मोहम्मद जाकिर की मौत उस वक्त हो गई, जब वह अपने कमरे में फांसी का सीन बनाकर वीडियो शूट कर रहा था। यह हादसा अब सोशल मीडिया के खतरनाक ट्रेंड्स पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
घटना 5 अप्रैल, रविवार की बताई जा रही है। जाकिर उस दिन घर में अकेला था। परिवार के बाकी सदस्य अपने-अपने काम में व्यस्त थे। उसकी मां शहनाज बानो घर में खाना बना रही थीं, जबकि जाकिर अपने कमरे में चला गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। कुछ देर बाद उसने एक खतरनाक वीडियो शूट करने का फैसला किया—फांसी लगाने की एक्टिंग करते हुए रील बनाना।
जानकारी के मुताबिक, जाकिर ने कमरे में फंदा तैयार किया और मोबाइल कैमरा सेट करके वीडियो बनाना शुरू किया। लेकिन इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सच में फंदे पर लटक गया। यह पूरा हादसा कुछ ही सेकंड में हुआ, जिससे उसे संभलने का मौका भी नहीं मिला।
काफी देर तक कमरे से कोई हलचल न होने पर उसकी मां को शक हुआ। उन्होंने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पड़ोसियों को बुलाया गया और दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए—जाकिर फंदे से लटका हुआ था और बेहोश था।

परिजन तुरंत उसे नीचे उतारकर अस्पताल लेकर गए। उसे बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज शुरू किया। हालत बेहद गंभीर थी और उसे लगातार निगरानी में रखा गया। करीब तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद बुधवार सुबह जाकिर ने दम तोड़ दिया।
पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक हादसा था, जो रील बनाने के दौरान हुआ। हालांकि पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
जाकिर के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। उसके पिता मोहम्मद रफीक कबाड़ का काम करते हैं। जाकिर ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी, जिसके बाद उसने स्कूल छोड़ दिया था। वह चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। परिवार के अनुसार, जाकिर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहता था और अक्सर रील्स बनाता था।
यह घटना न केवल परिवार के लिए एक बड़ा सदमा है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। आज के दौर में युवा तेजी से सोशल मीडिया की ओर आकर्षित हो रहे हैं और लाइक्स व व्यूज के लिए खतरनाक स्टंट करने से भी नहीं हिचकिचाते। ऐसे में यह हादसा बताता है कि थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे खतरनाक ट्रेंड्स को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए और उन्हें सुरक्षित व्यवहार के लिए प्रेरित करना चाहिए।
लखनऊ की यह घटना एक कड़वी सच्चाई सामने लाती है—सोशल मीडिया की लोकप्रियता की दौड़ कभी-कभी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। जरूरत है जागरूकता, सतर्कता और जिम्मेदारी की, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।