उत्तर प्रदेश: की राजधानी Lucknow में नगर निगम के विधि विभाग को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। नगर निगम पैनल में शामिल वकीलों की व्यापक समीक्षा के बाद खराब प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं को बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई से करीब 30 से अधिक वकीलों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
यह निर्णय मेयर Sushma Kharkwal और नगर आयुक्त Gaurav Kumar की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद लिया गया। बैठक में विधि विभाग के कामकाज पर असंतोष जताते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब केवल योग्य और सक्रिय वकीलों को ही पैनल में रखा जाएगा।
220 वकील पैनल में, लेकिन काम कम—बढ़ा दबाव
नगर निगम के पैनल में वर्तमान में लगभग 220 वकील सूचीबद्ध हैं, जबकि कुल मामलों की संख्या करीब 480 है। इनमें से ज्यादातर केस प्रॉपर्टी विवाद, अतिक्रमण, रोड निर्माण और कर्मचारियों से जुड़े मामलों के हैं। अधिकारियों के अनुसार, इतने अधिक वकीलों के बावजूद केसों की प्रभावी पैरवी नहीं हो पा रही है।
यही कारण है कि अब ऐसे वकीलों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने लंबे समय से कोई केस नहीं लड़ा या जिनका ट्रैक रिकॉर्ड कमजोर रहा है। उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

खराब पैरवी से हुआ नुकसान, अब सख्ती
हाल ही में एक मामले में नगर निगम को कमजोर पैरवी का खामियाजा भुगतना पड़ा था। सिविल कोर्ट के आदेश पर नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की तक की नौबत आ गई थी। यह मामला कैसरबाग स्थित एक शेल्टर होम से जुड़ा था, जहां भुगतान विवाद के चलते कोर्ट ने 2.17 लाख रुपए की डिक्री पास की थी।
इस घटना के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और विधि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। नगर आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
‘पैरवी’ नहीं, अब ‘परफॉर्मेंस’ मायने रखेगी
अधिकारियों के अनुसार, अब वकीलों को केस देने में केवल अनुभव और प्रदर्शन को ही प्राथमिकता दी जाएगी। किसी भी तरह की राजनीतिक सिफारिश या व्यक्तिगत पैरवी को नजरअंदाज किया जाएगा।
हालांकि, प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती भी है—उन वकीलों को हटाना, जिनकी सिफारिश प्रभावशाली नेताओं या अधिकारियों द्वारा की गई है। बावजूद इसके, अधिकारियों का कहना है कि इस बार निर्णय पूरी तरह मेरिट के आधार पर लिया जाएगा।
लिस्ट तैयार, जल्द होगा अंतिम फैसला
विधि विभाग द्वारा ऐसे वकीलों की सूची तैयार की जा रही है, जिन्हें पैनल से हटाया जाएगा। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 30 से अधिक वकील इस छंटनी की जद में आ सकते हैं। यह प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी और उसके बाद आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा।
नगर निगम की रणनीति—क्वालिटी पर फोकस
इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य नगर निगम के मामलों में मजबूत और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का मानना है कि कम लेकिन सक्षम वकीलों के साथ काम करने से केसों में सफलता दर बढ़ेगी और अनावश्यक कानूनी नुकसान से बचा जा सकेगा।