भारत: की वैश्विक रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री Rajnath Singh तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर Germany जा रहे हैं। इस दौरे को भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह अपने जर्मन समकक्ष Boris Pistorius और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच यह बातचीत न केवल रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित होगी, बल्कि भविष्य की सैन्य तकनीकों और रणनीतिक सहयोग को भी दिशा देगी।
डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप पर नजर
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप’ पर संभावित हस्ताक्षर है। यह रोडमैप भारत और जर्मनी के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।
इस समझौते के तहत संयुक्त उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। विशेष रूप से “मेक इन इंडिया” पहल के तहत रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

AI, ड्रोन और साइबर सुरक्षा पर फोकस
भारत और जर्मनी के बीच बातचीत में उभरती तकनीकों पर खास ध्यान रहेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में साझेदारी से दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं में बड़ा बदलाव आ सकता है। भविष्य के युद्धों में तकनीक की भूमिका को देखते हुए यह सहयोग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
मिलिट्री-टू-मिलिट्री सहयोग होगा मजबूत
इस दौरे में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग (Military-to-Military Engagement) को भी मजबूत करने पर चर्चा होगी। संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनने की संभावना है।
इसके अलावा, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ भी राजनाथ सिंह की बैठक प्रस्तावित है। इससे निजी और सरकारी क्षेत्र के बीच साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
पहले भी मजबूत रहे हैं रिश्ते
भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से ही मजबूत रही है। 14 अप्रैल को Berlin में हुई बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, ग्रीन एनर्जी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
इससे पहले 2019 में भारत की तत्कालीन रक्षा मंत्री Nirmala Sitharaman ने जर्मनी का दौरा किया था। वहीं, 2023 में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस भारत आए थे और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में बढ़ती अहमियत
भारत और जर्मनी के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखा जा रहा है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पक्षधर हैं।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच यह साझेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना भी है। जर्मन कंपनियों के साथ संयुक्त विकास और उत्पादन के जरिए भारत अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता को और मजबूत करना चाहता है।
यह पहल न केवल भारत की सुरक्षा क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी विकास में भी योगदान देगी।