उत्तर प्रदेश: के आगरा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दूल्हे को अपनी शादी की तैयारियों के बीच गैस सिलेंडर के लिए सरकारी दफ्तर का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हालात ऐसे बन गए कि उसे अपनी हल्दी की रस्म तक छोड़नी पड़ी।
हल्दी छोड़ दफ्तर पहुंचा दूल्हा
आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र स्थित केदार नगर निवासी गौरव की 20 अप्रैल को शादी तय है। घर में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या तब सामने आई जब दावत बनाने के लिए गैस सिलेंडर ही उपलब्ध नहीं हो पाया। शनिवार को हल्दी की रस्म के बीच ही गौरव अपने रिश्तेदारों के साथ पुलिस लाइन स्थित जिला पूर्ति कार्यालय पहुंच गया।
दूल्हे ने अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर अपनी परेशानी रखी। उसने शादी का कार्ड दिखाया, मेहमानों की सूची बताई और कहा कि “साहब, अगर गैस नहीं मिली तो दावत नहीं बन पाएगी, और इससे समाज में बदनामी हो जाएगी।”
दावत की चिंता ने बढ़ाई बेचैनी
गौरव ने अधिकारियों से कहा कि शादी में सैकड़ों मेहमान आने वाले हैं और उनके खाने का इंतजाम करना बेहद जरूरी है। घर में चूल्हा तक नहीं जल पा रहा, जिससे पूरे परिवार में चिंता का माहौल है। आखिरकार अधिकारियों ने रविवार तक सिलेंडर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
अक्षय तृतीया पर बढ़ी मांग
इस समस्या के पीछे एक बड़ी वजह शादी का सीजन भी है। खासकर अक्षय तृतीया के मौके पर आगरा में 1000 से ज्यादा शादियां हो रही हैं, जबकि पूरे जिले में करीब 1700 परिवार गैस सिलेंडर के लिए आवेदन कर चुके हैं। लेकिन आपूर्ति इतनी कम है कि मांग के मुकाबले सिर्फ 25 प्रतिशत गैस ही उपलब्ध हो पा रही है।
अन्य परिवार भी परेशान
यह समस्या सिर्फ गौरव के परिवार तक सीमित नहीं है। फतेहाबाद निवासी सुनील ने बताया कि उन्होंने भी 4 दिन पहले सिलेंडर के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक उन्हें गैस नहीं मिली। उनकी बहन की शादी है और हलवाई घर पर बैठा है, लेकिन गैस के अभाव में खाना नहीं बन पा रहा।
कैटरर्स और हलवाइयों की मुश्किलें
गैस की कमी ने कैटरर्स और हलवाइयों की भी परेशानी बढ़ा दी है। व्यावसायिक सिलेंडरों की सप्लाई में कटौती के कारण उन्हें ब्लैक में महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। छोटे सिलेंडरों के सहारे जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है, जिससे लागत बढ़ गई है और काम प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन का दावा
पूर्ति विभाग के जिला अधिकारी आनंद कुमार सिंह का कहना है कि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है और सभी आवेदकों को गैस उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है, क्योंकि दफ्तर के बाहर रोजाना दर्जनों परिवार मदद की गुहार लगाने पहुंच रहे हैं।
सामाजिक दबाव भी बड़ा कारण
भारतीय समाज में शादी सिर्फ एक व्यक्तिगत कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का मामला भी होती है। ऐसे में दावत का आयोजन न होना परिवार के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है। यही वजह है कि दूल्हा खुद अधिकारियों के पास मदद मांगने पहुंच गया।
आगरा का यह मामला सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं बल्कि सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है। शादी जैसे अहम मौके पर जरूरी संसाधनों की कमी ने लोगों को असहाय बना दिया है। प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी को अपनी शादी के लिए इस तरह दर-दर न भटकना पड़े।