उत्तर प्रदेश: के संभल जिले में शुक्रवार को प्रशासन की बड़ी कार्रवाई ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। मुबारकपुर बंद गांव में करीब 35 फीट ऊंची मस्जिद की मीनार को प्रशासन ने बुलडोजर और हाइड्रा मशीनों की मदद से गिरा दिया। यह कार्रवाई सुबह साढ़े 9 बजे शुरू हुई और दोपहर तक जारी रही, जिसमें पहले मस्जिद के बाहर बनी पांच दुकानों को तोड़ा गया और बाद में मीनार को ध्वस्त किया गया।
प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने के तहत की गई है। बताया गया कि करीब 15 साल पहले इस जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया था, जबकि इससे पहले यहां खेल मैदान के रूप में जमीन दर्ज थी।
कैसे गिराई गई 35 फीट ऊंची मीनार
मीनार को गिराने के लिए प्रशासन ने खास रणनीति अपनाई। दो हाइड्रा मशीनों को मौके पर लाया गया। एक मजदूर को मीनार के ऊपर चढ़ाकर रस्सी बांधी गई, जिसे दोनों मशीनों से जोड़ा गया। इसके बाद मशीनों ने एक साथ खींचकर मीनार को गिरा दिया। गिरते ही मीनार मस्जिद की छत पर आ गिरी, जिससे वहां धूल और मलबे का गुबार उठ गया।
इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मौके पर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके बिश्नोई समेत 50 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे। जैसे ही गांव के लोग इकट्ठा होने लगे, पुलिस ने तुरंत उन्हें वहां से हटा दिया ताकि किसी तरह का विरोध या तनाव न बढ़े।

पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई
दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब इस मस्जिद पर कार्रवाई हुई हो। इससे पहले 5 अप्रैल को भी प्रशासन यहां पहुंचा था, लेकिन उस दिन मीनार को गिराया नहीं जा सका था। बुलडोजर चालक ने मीनार की ऊंचाई और खतरे को देखते हुए इसे तोड़ने से मना कर दिया था। हालांकि उस दिन मदरसा, मस्जिद का गेट और कुछ दुकानों को आंशिक रूप से तोड़ा गया था।
आज की कार्रवाई में बाकी बचे हिस्सों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया।
ग्रामीणों की मजबूरी और दर्द
इस कार्रवाई के बीच कुछ ऐसे दृश्य भी सामने आए, जिन्होंने लोगों को भावुक कर दिया। गांव के गुलाम रसूल और आसमा के मकान भी आंशिक रूप से सरकारी जमीन पर बने पाए गए। प्रशासन के निर्देश पर दोनों ने खुद ही अपने घर के हिस्से तोड़ने शुरू कर दिए।
गुलाम रसूल ने बताया कि उन्होंने यह जमीन करीब 30 हजार रुपये में खरीदी थी और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह सरकारी जमीन है। वहीं आशा कार्यकर्ता आसमा ने सवाल उठाया कि अगर जमीन सरकारी थी तो इसे बेचा कैसे गया और अब उन्हें इसका मुआवजा मिलना चाहिए।
30 साल पुराना मामला, अब आया एक्शन में
जानकारी के मुताबिक, इस इलाके में करीब 30 साल पहले से अवैध कब्जे शुरू हो गए थे। समय के साथ यहां मस्जिद, दुकानें और मकान बन गए। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने 28 मार्च को नोटिस जारी किया और जमीन की नाप कराई।
इसके बाद 30 मार्च से अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन कुछ हिस्से बचे रह गए थे, जिन्हें अब पूरी तरह हटाया जा रहा है।
तनाव के बीच प्रशासन सख्त
प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान इलाके में तनाव जरूर देखा गया, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण स्थिति नियंत्रण में रही।
संभल में हुई यह कार्रवाई केवल एक अवैध निर्माण हटाने का मामला नहीं, बल्कि प्रशासन की सख्ती और जमीन विवादों की जटिलता को भी उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों की परेशानियां और पुराने जमीन सौदों की सच्चाई भी सामने आ रही है।