Live TV

For You

Channel

Menu

Live TV

For You

Channel

Menu

Live TV

For You

Channel

Menu

राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस, AAP में भूचाल: क्या पार्टी और सांसद के बीच बढ़ गई है खाई?

पंजाब: की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर उठ रहे मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है। पंजाब सरकार द्वारा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस लेने के फैसले ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।

भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब पार्टी और राघव चड्ढा के बीच पहले से ही तनाव चल रहा है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि मामला केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे राजनीतिक मतभेद छिपे हो सकते हैं।

सुरक्षा हटाने का फैसला और नया विवाद

राघव चड्ढा को पहले पंजाब पुलिस की सुरक्षा दी गई थी, क्योंकि वे राज्य में पार्टी के सह-प्रभारी और राज्यसभा में उपनेता जैसे अहम पदों पर थे। लेकिन अब उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

AAP के दिल्ली नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि केंद्र सरकार राघव चड्ढा को Z+ सुरक्षा देने की तैयारी में है। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब सांसद हमारी पार्टी का है, तो केंद्र सरकार इतनी मेहरबान क्यों हो रही है?”

हालांकि, राघव चड्ढा के करीबी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल उन्हें केंद्र से कोई सुरक्षा नहीं मिली है, लेकिन भविष्य में ऐसा हो सकता है। तब तक दिल्ली पुलिस की सुरक्षा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

AAP और राघव के बीच बढ़ता टकराव

यह विवाद अचानक नहीं हुआ, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से दोनों पक्षों के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है।

2 अप्रैल को AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया कि चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।

इस फैसले के बाद राघव चड्ढा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें “खामोश करने की कोशिश” की जा रही है, लेकिन वे हार मानने वाले नहीं हैं।

वीडियो और बयानबाजी से बढ़ी तकरार

राघव चड्ढा ने लगातार वीडियो जारी कर पार्टी पर “स्क्रिप्टेड कैंपेन” चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ एक संगठित तरीके से बयानबाजी की जा रही है।

दूसरी ओर, AAP के कई नेताओं—जिनमें आतिशी और अन्य शामिल हैं—ने चड्ढा पर आरोप लगाया कि वे पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे हैं और राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय नहीं हैं।

कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, तब राघव चड्ढा विदेश में थे और पार्टी के समर्थन में सक्रिय नहीं दिखे।

सोशल मीडिया और इशारों में तंज

विवाद तब और गहरा गया जब राघव चड्ढा ने एक पोस्ट में अमेरिकी लेखक रॉबर्ट ग्रीन की किताब “The 48 Laws of Power” का जिक्र किया।

उन्होंने जिस पन्ने की फोटो शेयर की, उसमें लिखा था कि “अपने बॉस से ज्यादा चमकने की कोशिश न करें।” इसे कई लोगों ने पार्टी नेतृत्व, खासकर केजरीवाल पर इशारा माना।

AAP नेताओं ने यह भी दावा किया कि राघव चड्ढा ने अपने पुराने सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर दिए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की गई थी।

क्या है आगे का सियासी संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद AAP के अंदरूनी संकट की ओर इशारा करता है। पार्टी के एक प्रमुख युवा चेहरे और शीर्ष नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है।

सुरक्षा हटाने का फैसला प्रशासनिक नजर आ सकता है, लेकिन जिस तरह से यह घटनाक्रम सामने आया है, उससे यह साफ है कि मामला राजनीतिक भी है।

राघव चड्ढा की सुरक्षा हटाने का मामला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि AAP के भीतर बढ़ते मतभेदों का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी इस विवाद को सुलझा पाती है या यह सियासी टकराव और गहराता है।

Read More News

[youtube-feed feed=1]
Scroll to Top