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Noida Workers Protest: 2026 में 12 राज्यों ने बढ़ाया न्यूनतम वेतन, यूपी में कितना और कौन सबसे आगे?

उत्तर प्रदेश: के औद्योगिक शहर नोएडा में इन दिनों फैक्टरी कर्मियों का गुस्सा सड़कों पर नजर आ रहा है। वेतन बढ़ोतरी और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर कर्मचारियों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस आंदोलन की चिंगारी उस समय भड़की, जब पड़ोसी राज्य हरियाणा में न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया।

प्रदर्शन में मुख्य रूप से होजरी और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। इनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन में वृद्धि, समय पर वेतन भुगतान (हर महीने की 10 तारीख तक), बेहतर कार्य परिस्थितियां और छुट्टियों की व्यवस्था शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों ने कई दिनों तक प्रशासन से बातचीत की, लेकिन वेतन वृद्धि पर सहमति नहीं बनने के कारण विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठे।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा वेतन में जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि वे हरियाणा के बराबर वेतन की मांग कर रहे हैं। हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, अकुशल कर्मियों का वेतन लगभग 11,274 रुपये से बढ़ाकर 15,220 रुपये कर दिया गया है। वहीं कुशल और उच्च-कौशल कर्मचारियों के वेतन में भी बड़ा इजाफा किया गया है।

इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में अकुशल कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन करीब 11,313 रुपये और कुशल कर्मियों के लिए लगभग 13,940 रुपये तय है। दैनिक वेतन के मामले में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। नोएडा में जहां मजदूरों को 435 से 536 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, वहीं गुरुग्राम और मानेसर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में यह 585 से 747 रुपये तक पहुंच चुका है।

इस वेतन असमानता के चलते कर्मचारियों में असंतोष तेजी से फैल रहा है। यही कारण है कि आंदोलन की लपटें अब भिवाड़ी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक भी पहुंचने लगी हैं।

2026 में किन राज्यों ने बढ़ाया न्यूनतम वेतन?

वर्ष 2026 में कई राज्यों ने श्रम कानूनों के तहत न्यूनतम वेतन में संशोधन किया है। इनमें प्रमुख रूप से पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और केरल शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल में 1 जनवरी 2026 से लागू नई दरों के तहत न्यूनतम वेतन को दो जोन—ए और बी—में विभाजित किया गया है, जहां शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें तय हैं।

महाराष्ट्र में तीन जोन (I, II, III) के आधार पर न्यूनतम वेतन तय किया गया है। यहां बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को अधिक वेतन मिलता है। विशेष नियम के तहत 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में 5% अतिरिक्त एचआरए भी जोड़ा जाता है।

तमिलनाडु में चार जोन और विभिन्न पदों के आधार पर वेतन निर्धारित किया गया है। यहां एक समान परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) ₹7,353 प्रति माह तय किया गया है, जो सभी श्रेणियों में लागू होता है।

उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से नई वेतन दरें लागू हैं, जो 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगी। राज्य में 74 अनुसूचित रोजगारों और इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए अलग-अलग वेतन संरचना तय की गई है।

केरल में वेतन निर्धारण का तरीका अन्य राज्यों से अलग है। यहां जिले और ग्रेड के आधार पर वेतन तय होता है, खासकर आईटी और वाणिज्यिक क्षेत्रों में।

क्यों बढ़ रहा है असंतोष?

विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यों के बीच वेतन में बढ़ती असमानता औद्योगिक क्षेत्रों में असंतोष का बड़ा कारण बन रही है। जहां कुछ राज्य निवेश और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कुछ राज्यों में मजदूरों को अपेक्षाकृत कम वेतन मिल रहा है।

नोएडा जैसे बड़े औद्योगिक हब में यह अंतर और भी ज्यादा स्पष्ट नजर आता है, क्योंकि यहां काम करने वाले श्रमिक अक्सर दूसरे राज्यों की तुलना करते हैं।

नोएडा में भड़का श्रमिक आंदोलन केवल वेतन का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्यों के बीच बढ़ती आर्थिक असमानता का संकेत है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह असंतोष और बड़े स्तर पर फैल सकता है।

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