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मौसम पर योगी का बड़ा सवाल: क्यों बार-बार बिगड़ रहा मौसम? वैज्ञानिकों ने बताया—ईरान-पाकिस्तान का असर

लखनऊ: में आयोजित उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से सवाल किया कि आखिर खेती के अहम समय में मौसम बार-बार क्यों बिगड़ रहा है। इस पर वैज्ञानिकों ने जो जवाब दिया, उसने सभी को चौंका दिया।

सीएम योगी ने अपने संबोधन में बताया कि हाल ही में उन्होंने कृषि मौसम वैज्ञानिकों से चर्चा की थी। उन्होंने पूछा कि जब किसान फसल की तैयारी में जुटे होते हैं, उसी समय अचानक बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं क्यों आ जाती हैं। इस पर वैज्ञानिकों ने बताया कि इसका मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) है, जो ईरान और पाकिस्तान क्षेत्र में बन रहा है।

ईरान-पाकिस्तान के मौसम का असर यूपी तक

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ईरान और पाकिस्तान में उठने वाले बवंडर और वायुमंडलीय बदलाव का असर भारत के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचता है। यह प्रभाव बादलों को नीचे खींचता है, जिससे असमय बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनती है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से यूपी के कई जिलों में मौसम लगातार खराब बना हुआ है।

सीएम योगी ने इस पर कहा कि यह स्थिति केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि वैश्विक मौसम प्रणाली का हिस्सा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “वहां युद्ध या उथल-पुथल होती है, लेकिन उसका असर हमारे किसानों पर पड़ता है।”

किसानों पर पड़ रहा सीधा असर

उत्तर प्रदेश में पिछले करीब 15 दिनों से बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। हजारों एकड़ फसल बर्बाद होने की खबरें सामने आई हैं।

सीएम ने माना कि इस तरह के मौसम बदलाव आने वाले समय में और बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि “कुछ लोगों की प्रवृत्ति जैसी होती है, प्रकृति भी वैसी ही प्रतिक्रिया देती है,” और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।

‘लैब टू लैंड’ नहीं, अब ‘लैब इन लैंड’ की जरूरत

अपने भाषण में योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि केवल प्रयोगशालाओं में शोध करने के बजाय खेती के मैदान में ही वैज्ञानिक तकनीकों को लागू किया जाए।

उन्होंने ‘लैब टू लैंड’ की जगह ‘लैब इन लैंड’ का नया मॉडल अपनाने की बात कही, जिससे किसानों को सीधे फायदा मिल सके और वे बदलते मौसम के अनुरूप खुद को ढाल सकें।

कृषि और अर्थव्यवस्था का पुराना रिश्ता

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार हमेशा कृषि रहा है। एक समय ऐसा था जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा हिस्सा था, और इसकी वजह मजबूत कृषि व्यवस्था थी।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले किसान सिर्फ खेती तक सीमित नहीं था, बल्कि वह कारीगर और उद्यमी भी होता था। लेकिन समय के साथ यह संतुलन बिगड़ गया।

2017 से पहले और बाद का अंतर

सीएम योगी ने 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय किसानों और सरकार के बीच भरोसे की कमी थी। गन्ना भुगतान वर्षों तक अटका रहता था और किसान कर्ज में डूबा रहता था।

उन्होंने दावा किया कि अब स्थिति बदल चुकी है। राज्य में चीनी मिलें बेहतर तरीके से काम कर रही हैं और किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है।

सरकार की योजनाएं और भविष्य की रणनीति

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के लिए नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। साथ ही उन्होंने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे ऐसे समाधान निकालें जो सीधे किसानों के काम आ सकें।

कार्यक्रम के दौरान कई वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया गया और कृषि क्षेत्र में नवाचार पर चर्चा हुई।

लखनऊ में दिए गए इस बयान से साफ है कि मौसम में हो रहे बदलाव केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक प्रभावों का परिणाम हैं। ईरान-पाकिस्तान क्षेत्र में बन रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर उत्तर प्रदेश तक पहुंच रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिकों और सरकार को मिलकर दीर्घकालिक समाधान निकालने की जरूरत है, ताकि अन्नदाता को इस संकट से बचाया जा सके।

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