उत्तर प्रदेश: में सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सभी कर्मचारियों के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई और सतर्कता जांच का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने शासनादेश जारी कर दिया है।
इस नए आदेश के तहत मानव संपदा पोर्टल को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया गया है। अब सभी विभागों को अपने कर्मचारियों से जुड़ी जांच और कार्रवाई की जानकारी इस पोर्टल पर अपडेट करनी होगी।
शासनादेश के अनुसार, प्रत्येक विभाग के ऑफिस एडमिन आईडी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने अधीन कार्यरत सभी कर्मचारियों का डेटा अपडेट करें। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या सतर्कता जांच चल रही है, उनके सामने संबंधित कॉलम में “हां” दर्ज करना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित कर्मचारी की सर्विस बुक में भी यह जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाए। वहीं जिन कर्मचारियों के खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही है, उनके रिकॉर्ड में “नहीं” का उल्लेख करना होगा। इससे पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और किसी भी कर्मचारी की स्थिति को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

सरकार ने इस प्रक्रिया को सुचारु रूप से लागू करने के लिए विभागीय अधिकारियों को एक निर्धारित प्रारूप भी उपलब्ध कराया है। सभी रिपोर्टिंग कार्यालयों के नोडल ऑफिस एडमिन को अपने लॉगिन के माध्यम से पोर्टल में प्रवेश कर कर्मचारियों की स्थिति अपडेट करनी होगी।
इस कदम को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह सिस्टम अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगा।
अब तक कई मामलों में यह देखा गया था कि कर्मचारियों के खिलाफ चल रही जांच या कार्रवाई की जानकारी समय पर अपडेट नहीं होती थी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती थी। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद हर जानकारी रियल-टाइम में उपलब्ध होगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस तरह की जानकारी को सार्वजनिक और व्यवस्थित करने से न केवल कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि आम जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।
हालांकि, कुछ कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि बिना पूरी जांच के किसी कर्मचारी के खिलाफ जानकारी सार्वजनिक करना उसकी छवि को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डेटा की गोपनीयता और निष्पक्षता बनी रहे।
इसके बावजूद, प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को एक सख्त और जरूरी कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल न केवल सिस्टम को मजबूत बनाएगी, बल्कि कर्मचारियों को भी अपने काम के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है। मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारियों की जांच और कार्रवाई का रिकॉर्ड ऑनलाइन करने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।