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आधी रात हिली धरती! दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके, लोग घरों से भागे

शुक्रवार: रात उत्तर भारत के कई हिस्सों में अचानक आए भूकंप के झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। राजधानी दिल्ली-एनसीआर में जैसे ही धरती कांपी, लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कुछ सेकंड के इस कंपन ने पूरे इलाके में डर का माहौल बना दिया।

5.9 तीव्रता का भूकंप, अफगानिस्तान रहा केंद्र

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.9 मापी गई। इसका केंद्र अफगानिस्तान में जमीन से लगभग 150 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। गहराई अधिक होने की वजह से इसका असर दूर-दूर तक महसूस किया गया।

हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी बड़े नुकसान या जानमाल के हानि की सूचना सामने नहीं आई है।

उत्तर भारत के कई राज्यों में झटके

भूकंप के झटके सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहे। पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों ने कंपन महसूस किया।

कई लोगों ने बताया कि पंखे और दरवाजे हिलने लगे, जिससे उन्हें तुरंत बाहर निकलना पड़ा।

डर के मारे घरों से बाहर निकले लोग

झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर खड़े हो गए। रात का समय होने के कारण दहशत और ज्यादा बढ़ गई।

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि झटकों का असर व्यापक था।

क्यों आता है भूकंप?

भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियों के कारण आता है। पृथ्वी के अंदर कई प्लेट्स लगातार गतिशील रहती हैं।

जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या दबाव बढ़ता है, तो ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे धरती कांपती है और भूकंप आता है।

केंद्र (एपीसेंटर) और तीव्रता का मतलब

भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जहां से ऊर्जा निकलती है और कंपन सबसे ज्यादा महसूस होता है। इसे एपीसेंटर कहा जाता है।

जैसे-जैसे हम इस केंद्र से दूर जाते हैं, कंपन की तीव्रता कम होती जाती है।

रिक्टर स्केल से मापी जाती है तीव्रता

भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है, जो 1 से 9 तक होता है।

  • 4-5: हल्के झटके
  • 5-6: मध्यम झटके
  • 6 से ऊपर: नुकसान की संभावना

इस मामले में 5.9 तीव्रता का भूकंप मध्यम श्रेणी का था, जिसने लोगों को डरा तो दिया, लेकिन बड़े नुकसान से बचाव हो गया।

क्या आगे भी खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे भूकंप भविष्य में बड़े झटकों का संकेत हो सकते हैं। उत्तर भारत भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए यहां सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

लोगों को आपदा प्रबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।


दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में महसूस हुए इस भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाएं कभी भी आ सकती हैं।

हालांकि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस तरह के झटके लोगों में डर और सतर्कता दोनों पैदा करते हैं।

आवश्यक है कि हम जागरूक रहें और ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहें।

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