भारत: की समुद्री ताकत को एक बड़ा बूस्ट देते हुए स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है। Rajnath Singh ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम में इसे औपचारिक रूप से नौसेना को सौंपा। इस दौरान उन्होंने कहा, “अरिदमन महज एक शब्द नहीं, बल्कि भारत की शक्ति का प्रतीक है।”
INS अरिदमन देश की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करेगी। यह पनडुब्बी ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक अहम उदाहरण मानी जा रही है।
क्यों खास है INS अरिदमन?
INS अरिदमन की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टील्थ क्षमता और घातक मारक शक्ति है। यह पनडुब्बी पानी के भीतर करीब 44 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है और दुश्मनों के लिए इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है।
यह के-15 और के-4 जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है, जो लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने में सक्षम हैं। इस वजह से भारत की ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ (थल, जल और वायु से परमाणु हमला करने की क्षमता) और मजबूत हो गई है।
INS अरिदमन आकार और क्षमता के मामले में अपने पूर्ववर्ती पनडुब्बियों से अधिक उन्नत और शक्तिशाली है। यह न केवल दुश्मन के लिए चुनौती है, बल्कि भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा कदम भी है।

पहले से मौजूद पनडुब्बियों से कितना अलग?
INS अरिदमन से पहले भारतीय नौसेना के पास INS Arihant और INS Arighat जैसी परमाणु पनडुब्बियां थीं। INS अरिहंत को 2016 में और INS अरिघात को 2024 में नौसेना में शामिल किया गया था।
नई पनडुब्बी इन दोनों से अधिक आधुनिक तकनीक, बेहतर स्टील्थ फीचर्स और अधिक मारक क्षमता के साथ आई है। इसके साथ ही इस श्रृंखला की चौथी पनडुब्बी भी तैयार हो रही है, जो फिलहाल समुद्री परीक्षण के दौर में है।
INS तारागिरी भी बना आकर्षण का केंद्र
INS अरिदमन के साथ ही भारतीय नौसेना को एक और बड़ी सौगात मिली— INS Taragiri। यह प्रोजेक्ट 17A के तहत बना एक अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसमें 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
करीब 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत आधुनिक रडार से बचने वाली तकनीक से लैस है। इसकी डिजाइन और तकनीक इसे दुश्मनों के लिए बेहद खतरनाक बनाती है।
मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित यह जहाज भारत के बढ़ते रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इसमें 200 से अधिक MSMEs का योगदान रहा है, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता को दर्शाता है।
रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह कदम?
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है। पूर्वी तट और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए ऐसी उन्नत पनडुब्बियां और युद्धपोत बेहद जरूरी हैं।
INS अरिदमन की तैनाती से भारत की निगरानी, रक्षा और जवाबी कार्रवाई की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। यह दुश्मनों के खिलाफ एक मजबूत ‘डिटरेंस’ (निवारक शक्ति) का काम करेगी।
रक्षा मंत्री का संदेश
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस मौके पर कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरण खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि खुद निर्माण करने वाला राष्ट्र बन चुका है। उन्होंने इसे देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का बड़ा उदाहरण बताया।
INS अरिदमन और INS तारागिरी की कमीशनिंग भारत की रक्षा ताकत में ऐतिहासिक इजाफा है। यह न केवल देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान देगा। आने वाले वर्षों में ऐसी और परियोजनाएं भारत को एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करेंगी।