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मोदी-ली मुलाकात से बदलेंगे एशिया के समीकरण? 8 साल बाद भारत आए दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति, बड़े समझौतों के संकेत

नई दिल्ली: में इस समय वैश्विक कूटनीति का एक अहम अध्याय लिखा जा रहा है। Lee Jae-myung के भारत दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने की उम्मीदें जगा दी हैं। करीब आठ वर्षों के बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की यह यात्रा हो रही है, जिससे यह दौरा और भी महत्वपूर्ण बन जाता है।

दौरे की शुरुआत में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ व्यापार, टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने इस मुलाकात के बाद विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति ली के बीच होने वाली वार्ता भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

8 साल बाद ऐतिहासिक दौरा क्यों खास?

यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। वर्ष 2015 में भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा दिया था। तब से दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है।

सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हुई है। भारत में दक्षिण कोरियाई कंपनियों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है, जबकि भारतीय कंपनियां भी कोरिया में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।

मोदी-ली बैठक पर टिकी नजरें

इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव है प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक। यह बैठक नई दिल्ली के Hyderabad House में आयोजित होगी, जहां कई बड़े समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

विशेष रूप से व्यापार और निवेश को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा रक्षा उत्पादन में सहयोग बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा।

बिजनेस फोरम और निवेश के नए रास्ते

राष्ट्रपति ली Bharat Mandapam में आयोजित बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे। इस फोरम में दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपति शामिल होंगे और निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोरम भारत में निवेश को नई गति दे सकता है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर में।

सांस्कृतिक और रणनीतिक रिश्तों का संगम

भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध सिर्फ आर्थिक या रणनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव लंबे समय से रहा है, जो इस साझेदारी को और गहराई देता है।

इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति ली, भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu से भी मुलाकात करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को और मजबूती मिलेगी।

ग्लोबल साउथ में नई रणनीति

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया का सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दोनों देश तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर न केवल अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित करना चाहते हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान देना चाहते हैं।

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