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बंगाल चुनाव में बवाल: 15 बूथों पर दोबारा वोटिंग, EVM छेड़छाड़ के आरोपों से गरमाई सियासत

पश्चिम बंगाल: में चुनावी माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान सामने आई हिंसा, EVM से छेड़छाड़ और गड़बड़ी की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए 15 बूथों पर दोबारा मतदान (रीपोलिंग) कराने का फैसला किया है। यह मतदान शनिवार सुबह 7 बजे से शुरू होगा।

यह मामला खासतौर पर डायमंड हार्बर और मगराहट पश्चिम क्षेत्रों से जुड़ा है, जहां क्रमशः 4 और 11 बूथों पर गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन बूथों पर मतदान के दौरान हिंसा, झड़प और EVM के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों और ऑब्जर्वरों ने अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजधानी कोलकाता में स्थिति और संवेदनशील हो गई है। यहां सात EVM स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए इन स्ट्रॉन्ग रूम के 200 मीटर के दायरे में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की लगभग 700 कंपनियां तैनात की गई हैं। भारी सुरक्षा के बीच हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।

विवाद की शुरुआत गुरुवार रात हुई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया कि बिना सूचना के EVM स्ट्रॉन्ग रूम खोले गए और वहां संदिग्ध लोग मौजूद थे। इस आरोप के बाद TMC कार्यकर्ता और नेता खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सखावत मेमोरियल गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल स्थित स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचीं। वह करीब 4 घंटे तक अंदर रहीं और बाहर आकर उन्होंने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि EVM में छेड़छाड़ या मतगणना में गड़बड़ी की कोशिश की गई तो वे इसके खिलाफ हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगी।

दूसरी ओर, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी पार्टियों के एजेंट वहां मौजूद थे।

गुरुवार रात के घटनाक्रम में नारेबाजी, हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप के बीच पुलिस पर लाठीचार्ज के भी आरोप लगे। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिया।

इस बीच एक और चौंकाने वाली घटना हल्दिया से सामने आई, जहां एक महिला फर्जी ID कार्ड के साथ DCRC सेंटर में घुस गई। पूछताछ में उसने खुद को आईटी विभाग की कर्मचारी बताया, लेकिन बाद में उसका ID फर्जी निकला। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्देश जारी किए हैं कि मतगणना के दौरान हर राउंड में ऑब्जर्वर की मौजूदगी अनिवार्य होगी। साथ ही CCTV फुटेज और वेबकास्टिंग डेटा की भी जांच की जा रही है, खासकर उन बूथों की जहां कैमरे कुछ समय के लिए बंद हो गए थे और बाद में वोटिंग प्रतिशत में अचानक वृद्धि देखी गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ दल पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है।

फिलहाल सभी की नजरें शनिवार को होने वाली रीपोलिंग और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन घटनाओं का चुनाव परिणामों पर कितना असर पड़ता है।

बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान सामने आए विवाद और सुरक्षा मुद्दे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदम स्थिति को नियंत्रित करने की दिशा में अहम हैं, लेकिन पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी चुनौती है।

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