मिडिल ईस्ट: में एक बार फिर युद्ध के बादल तेजी से गहराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना वीकेंड प्लान अचानक रद्द कर दिया और तुरंत व्हाइट हाउस लौट आए। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह चर्चा तेज हो गई कि अमेरिका ईरान पर बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस और पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों को छुट्टियां रद्द कर तुरंत ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। रक्षा विशेषज्ञ इसे किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी मान रहे हैं। इसी बीच ईरान ने भी बड़ा कदम उठाते हुए अपने पूरे एयरस्पेस को कमर्शियल और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बंद कर दिया है। इस फैसले ने दुनिया भर की एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है।
ट्रंप ने अचानक क्यों बदला कार्यक्रम?
सूत्रों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप इस वीकेंड न्यू जर्सी स्थित अपने गोल्फ रिसॉर्ट जाने वाले थे, लेकिन सुरक्षा हालातों को देखते हुए उन्होंने कार्यक्रम रद्द कर दिया। इसके तुरंत बाद वे व्हाइट हाउस लौटे और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ आपात बैठक की।
अमेरिकी मीडिया संस्थान CBS News ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ नए दौर के एयर स्ट्राइक की तैयारी में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका को लग रहा है कि शांति वार्ता का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकल रहा, इसलिए सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
ईरान ने क्यों बंद किया एयरस्पेस?
ईरान द्वारा अचानक एयरस्पेस बंद करने के फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, ईरान के आसमान से लगभग सभी कमर्शियल विमान गायब हो चुके हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को डर है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर उसके परमाणु ठिकानों और सैन्य अड्डों पर हमला कर सकते हैं। ऐसे में उसने एहतियातन अपने हवाई क्षेत्र को सील कर दिया है ताकि किसी भी संभावित हमले के दौरान नागरिक विमानों को नुकसान न पहुंचे।

क्या शुरू होने वाला है नया युद्ध?
मिडिल ईस्ट पहले से ही इजरायल-ईरान तनाव, गाजा संघर्ष और कई आतंकी गतिविधियों से जूझ रहा है। अब अमेरिका की सीधी सैन्य कार्रवाई की खबरों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो इसका असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, वैश्विक बाजार हिल सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संकट गहरा सकता है।
भारत समेत कई देशों की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर पड़ता है।
अमेरिका-ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता आया है।
हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों और अमेरिकी हितों के बीच कई टकराव सामने आए हैं। इसके बाद से अमेरिका ने अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। ट्रंप प्रशासन पहले भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है।
दुनिया भर में बढ़ी चिंता
ईरान के एयरस्पेस बंद करने और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के बाद दुनियाभर में चिंता बढ़ गई है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपने रूट बदल दिए हैं। वहीं तेल बाजार में भी हलचल देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में हालात नहीं सुधरे, तो मिडिल ईस्ट में बड़े स्तर का युद्ध छिड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर व्हाइट हाउस, पेंटागन और तेहरान पर टिकी हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ट्रंप की अचानक सक्रियता और ईरान द्वारा एयरस्पेस बंद किए जाने से साफ संकेत मिल रहे हैं कि हालात सामान्य नहीं हैं। अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो मिडिल ईस्ट एक और बड़े युद्ध की आग में झुलस सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।