बिहार: की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त चेतावनी देते हुए बड़ा ऐलान कर दिया। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी नागरिक की शिकायत का समाधान 30 दिनों के भीतर नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी 31वें दिन स्वतः निलंबित माना जाएगा।
पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘सहयोग पोर्टल’ और हेल्पलाइन नंबर 1100 का शुभारंभ किया। इसी मंच से उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को जवाबदेह बनाने के लिए नई कार्यप्रणाली लागू करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री का यह बयान अब पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है।
“फाइल दबाकर रखने वालों की अब खैर नहीं”
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अक्सर आम लोगों की फाइलें सरकारी दफ्तरों में महीनों तक लंबित रहती हैं। इससे जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों और बाबुओं को चेतावनी देते हुए कहा कि अब ऐसी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा:
“अगर कोई व्यक्ति अपनी समस्या लेकर आता है तो 30 दिनों के भीतर उसका समाधान होना चाहिए। यदि संबंधित अधिकारी ऐसा नहीं करता है तो 31वें दिन वह स्वतः सस्पेंड माना जाएगा।”
मुख्यमंत्री के इस सख्त बयान के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

आम जनता के लिए शुरू हुआ ‘त्रिवेणी सिस्टम’
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ‘त्रिवेणी सिस्टम’ शुरू करने की घोषणा की। इस नई व्यवस्था में तीन प्रमुख माध्यमों को जोड़ा गया है:
- पंचायत स्तर पर शिकायत निवारण शिविर
- टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1100
- ऑनलाइन सहयोग पोर्टल
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सिस्टम का मकसद लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचाना और शिकायतों का तय समय में समाधान सुनिश्चित करना है।
हर शिकायत पर 30 दिन की समय सीमा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ब्लॉक कार्यालय, पुलिस स्टेशन, राजस्व विभाग या अन्य सरकारी कार्यालयों से संबंधित कोई भी शिकायत आने पर संबंधित अधिकारी को 30 दिनों के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने लापरवाही दिखाई या शिकायत को अनदेखा किया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार अब “जवाबदेह प्रशासन” की दिशा में काम कर रही है।
पंचायत स्तर पर लगेंगे ‘सहयोग शिविर’
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर ‘सहयोग शिविर’ आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और मौके पर ही समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उन्होंने जिलों के प्रभारी मंत्रियों से भी अपील की कि वे इन शिविरों में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें और जनता से सीधा संवाद स्थापित करें।
हेल्पलाइन 1100 और पोर्टल से मिलेगी राहत
सरकार ने शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1100 लॉन्च किया है। इसके अलावा ‘सहयोग पोर्टल’ पर भी लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही शिकायत का समाधान होगा, शिकायतकर्ता को लिखित सूचना भी दी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का भरोसा प्रशासन पर मजबूत होगा।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह फैसला बिहार में प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। लंबे समय से सरकारी दफ्तरों में फाइलें लंबित रहने और अधिकारियों की लापरवाही को लेकर जनता नाराज रहती थी।
अब सरकार ने समयबद्ध समाधान की बात कहकर साफ संदेश दिया है कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
विपक्ष क्या कह रहा है?
मुख्यमंत्री के इस फैसले पर विपक्ष भी नजर बनाए हुए है। कुछ नेताओं ने इसे अच्छा कदम बताया है, जबकि कुछ का कहना है कि केवल घोषणा करने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर निगरानी और ईमानदार क्रियान्वयन जरूरी होगा।
हालांकि जनता के बीच इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सोशल media पर भी लोग मुख्यमंत्री के बयान की चर्चा कर रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने प्रशासनिक अधिकारियों को साफ संदेश दे दिया है कि अब लापरवाही और फाइलों को लंबित रखने का दौर खत्म होना चाहिए। ‘त्रिवेणी सिस्टम’, हेल्पलाइन 1100 और सहयोग पोर्टल के जरिए सरकार जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि यह सख्त चेतावनी जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाती है।