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“60 मिनट की सीक्रेट डिप्लोमेसी!” PM मोदी और मार्को रुबियो की अहम बैठक खत्म, दुनिया की टिकी नजरें

नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शनिवार को नई दिल्ली में बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल बैठक हुई। करीब 60 मिनट तक चली इस मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के दौरान रक्षा सहयोग, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई।

दुनिया की नजरें इस बैठक पर इसलिए भी टिकी थीं क्योंकि यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध को लेकर वैश्विक तनाव बढ़ा हुआ है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर भी अमेरिका और उसके सहयोगी देश सतर्क हैं।

भारत यात्रा पर क्यों खास हैं मार्को रुबियो?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 23 मई से 26 मई तक भारत के चार दिवसीय दौरे पर हैं। यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। खास बात यह भी है कि करीब 14 वर्षों बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री ने कोलकाता का दौरा किया है। इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन वहां गई थीं।

भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रुबियो के आगमन की जानकारी देते हुए कहा कि यह यात्रा भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बीच कई अहम वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें शामिल हैं—

  • रक्षा साझेदारी को मजबूत करना
  • ट्रेड और टैरिफ से जुड़े मुद्दे
  • AI और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में सहयोग
  • ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति
  • इंडो-पैसिफिक रणनीति
  • आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा
  • क्वाड देशों के बीच समन्वय

बैठक के बाद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मीडिया से कहा कि बातचीत “बेहद सकारात्मक” रही और दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

भारत को ज्यादा तेल बेचना चाहता है अमेरिका

भारत दौरे से पहले मार्को रुबियो ने अमेरिका की ऊर्जा नीति को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी तेल और गैस खरीदे। रुबियो के मुताबिक अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन कर रहा है और वह भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों में बड़ा साझेदार बनना चाहता है।

उन्होंने यह भी संकेत दिए कि वेनेजुएला के साथ ऊर्जा सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं। माना जा रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा इस दौरे के सबसे महत्वपूर्ण एजेंडों में शामिल है।

क्वाड बैठक पर भी दुनिया की नजरें

मार्को रुबियो की इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को होने वाली क्वाड देशों की बैठक मानी जा रही है। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे।

बैठक की मेजबानी भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar करेंगे। वहीं ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Motegi Toshimitsu भी इसमें हिस्सा लेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर बड़ा फोकस रहेगा।

रक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी पर बड़ा जोर

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। भारतीय सेना पहले से ही अमेरिकी तकनीक आधारित कई आधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है, जिनमें P-8 पोसाइडन विमान, MQ-9B स्काईगार्डियन ड्रोन, M777 हॉवित्जर तोप और C-17 ग्लोबमास्टर जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

अब दोनों देश केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि को-प्रोडक्शन, AI, साइबर सिक्योरिटी, स्पेस टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।

भारत-अमेरिका रिश्तों को नई दिशा

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी मार्को रुबियो के दौरे को “भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” को नई मजबूती देने वाला बताया है। मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

मार्को रुबियो की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रुबियो की 60 मिनट की बैठक ने साफ संकेत दिया है कि भारत और अमेरिका आने वाले समय में रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक रणनीति के क्षेत्र में और करीब आने वाले हैं। क्वाड बैठक और आगे की बातचीत अब दुनिया की निगाहों में बनी हुई है।

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