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“देहरादून में मस्जिद सील होते ही सड़कों पर उतरा मुस्लिम समुदाय! डीएम कार्यालय कूच से पहले भारी पुलिस फोर्स तैनात”

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में थानो क्षेत्र स्थित जामा मस्जिद को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मस्जिद के भूतल को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के विरोध में मुस्लिम सेवा संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग जिलाधिकारी कार्यालय की ओर कूच करने के लिए एकत्र हुए, जिसके चलते पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। एसटीएफ कार्यालय के बाहर मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्र हुए, जहां से डीएम कार्यालय तक मार्च निकालने की तैयारी की गई। प्रशासन को आशंका थी कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है, इसलिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।

मस्जिद सील होने पर मुस्लिम सेवा संगठन का विरोध

मुस्लिम सेवा संगठन का आरोप है कि संबंधित मस्जिद के सभी आवश्यक दस्तावेज और कानूनी कागजात मौजूद हैं, इसके बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मस्जिद को सील कर दिया। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि बिना उचित सुनवाई और संतोषजनक कारण बताए धार्मिक स्थल पर कार्रवाई करना समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।

संगठन के नेताओं ने प्रशासन से कार्रवाई वापस लेने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, थानो क्षेत्र के ग्राम कण्डोगल-कुडियाल में स्थित जामा मस्जिद और मदरसे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। स्थानीय लोगों और कुछ हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि मस्जिद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और मदरसा बोर्ड में विधिवत पंजीकृत नहीं है।

इन शिकायतों के आधार पर संबंधित विभागों ने जांच शुरू की थी। जांच के बाद पहले मस्जिद के प्रथम तल को सील किया गया था। इसके बाद हाल ही में भूतल को भी प्रशासनिक कार्रवाई के तहत सील कर दिया गया।

काली सेना और बजरंग दल भी सक्रिय

मामले में काली सेना, बजरंग दल और स्थानीय संगठनों की भूमिका भी लगातार चर्चा में रही है। इन संगठनों ने लंबे समय से मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

मस्जिद के भूतल को सील किए जाने के बाद इन संगठनों ने थानो चौक पर हवन कार्यक्रम आयोजित कर प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन किया। संगठनों का कहना है कि यदि निर्माण नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ है तो कार्रवाई स्वाभाविक है।

काली सेना के प्रदेश प्रमुख भूपेश जोशी ने कहा कि उनकी मांग केवल सीलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित ढांचे के ध्वस्तीकरण पर भी प्रशासन को विचार करना चाहिए।

प्रशासन की नजर हर गतिविधि पर

मुस्लिम सेवा संगठन के प्रदर्शन के मद्देनजर प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था भंग करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए रहीं।

राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज

मस्जिद सीलिंग की कार्रवाई के बाद मामला केवल प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। एक पक्ष इसे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की कार्रवाई के रूप में देख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने की जरूरत होती है ताकि किसी भी प्रकार का सामाजिक तनाव न बढ़े।

आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभागों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मुस्लिम सेवा संगठन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

वहीं दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और किसी भी निर्णय में नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है।

देहरादून में मस्जिद विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर लिए जाने वाले फैसले इस विवाद की दिशा तय करेंगे।

देहरादून के थानो क्षेत्र में मस्जिद सील किए जाने के बाद विरोध और समर्थन दोनों पक्षों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुस्लिम सेवा संगठन जहां कार्रवाई को अनुचित बता रहा है, वहीं कुछ सामाजिक संगठन इसे नियमों के पालन की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं। फिलहाल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मामले का अंतिम समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत ही तय होगा।

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