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सिर्फ जलेबी के लिए कर दी हत्या! लाइन में इंतजार नहीं करना चाहता था नीरज, 12 साल बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 12 साल पहले हुई एक सनसनीखेज हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। महज जलेबी पहले देने से इनकार करने पर मिठाई विक्रेता की गोली मारकर हत्या करने वाले दोषी नीरज को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2014 का है, जिसने उस समय पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा की अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिए जाने के बाद नीरज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अपराध बेहद गंभीर था, लेकिन उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना 18 फरवरी 2014 की है। दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास स्थित एक मिठाई की दुकान पर नीरज जलेबी खरीदने पहुंचा था। दुकान पर पहले से कई ग्राहक लाइन में खड़े थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नीरज ने दुकानदार से मांग की कि उसे कतार में खड़े अन्य ग्राहकों से पहले जलेबी दी जाए। जब विक्रेता ने सभी ग्राहकों के साथ समान व्यवहार करते हुए उसकी मांग ठुकरा दी, तो दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

मामूली विवाद कुछ ही मिनटों में हिंसक रूप ले बैठा।

पहले थप्पड़, फिर सिर में मारी गोली

अभियोजन पक्ष के अनुसार, बहस के दौरान नीरज ने पहले दुकानदार को थप्पड़ मारा। इसके बाद उसने अपने पास मौजूद पिस्तौल निकाली और बेहद करीब से मिठाई विक्रेता के सिर में गोली मार दी।

गोली लगते ही दुकान और आसपास अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घायल दुकानदार को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।

घटनास्थल के पास ही दबोचा गया आरोपी

हत्या के तुरंत बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी नीरज को घटनास्थल के नजदीक से गिरफ्तार कर लिया।

जांच के दौरान उसके कब्जे से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस भी बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने हत्या और आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।

फोरेंसिक रिपोर्ट, चश्मदीद गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की।

12 साल बाद आया अदालत का फैसला

करीब 12 वर्षों तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और पुलिस जांच को आधार बनाते हुए नीरज को दोषी करार दिया।

सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि आरोपी का अपराध अत्यंत गंभीर है क्योंकि उसने महज एक मामूली विवाद में किसी व्यक्ति की जान ले ली।

हालांकि अदालत ने यह भी माना कि आरोपी का पहले कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, वह पूरे मुकदमे के दौरान न्यायिक हिरासत में रहा और उसके सुधार की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

मौत की सजा क्यों नहीं दी गई?

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड केवल उन मामलों में दिया जाता है जिन्हें ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ माना जाता है।

न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि दोषी के परिवार में उसकी पत्नी और दो बेटे हैं तथा उसके पुनर्वास की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मृत्युदंड देने के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाना उचित समझा।

समाज के लिए बड़ा संदेश

यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि छोटी-सी बात पर गुस्से में लिया गया हिंसक फैसला कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर धैर्य, कानून का सम्मान और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

अदालत का यह फैसला यह संदेश भी देता है कि मामूली विवाद में की गई हिंसा और हत्या जैसे अपराधों पर कानून सख्त कार्रवाई करता है और दोषियों को देर-सबेर सजा जरूर मिलती है।

दिल्ली के चर्चित ‘जलेबी हत्या कांड’ में अदालत का फैसला न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है। महज लाइन में पहले जलेबी पाने की जिद ने एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले ली और आरोपी को अब जीवनभर जेल की सजा भुगतनी होगी। यह मामला समाज के लिए संयम, धैर्य और कानून के सम्मान का महत्वपूर्ण संदेश छोड़ता है।

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