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‘3 भारतीय नाविकों की मौत पर चुप क्यों सरकार?’ प्रियंका गांधी ने PM मोदी से कहा- ट्रंप के सामने उठाइए बड़ा मुद्दा

अंतरराष्ट्रीय: मंच पर भारत की भूमिका और विदेश नीति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह मुद्दा मजबूती से उठाने की मांग की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस के दौरे पर हैं। इस दौरान उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इसी मुलाकात को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि भारतीय नागरिकों की मौत का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 10 जून को पलाऊ के ध्वज वाले जहाज एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान बड़ा हादसा हुआ। इस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई जबकि अन्य नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

इस घटना के बाद भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और अमेरिका से जवाब मांगने की मांग की।

प्रियंका गांधी ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली मुलाकात में यह मुद्दा अवश्य उठाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों की जान का सवाल अत्यंत गंभीर है और इस विषय पर सरकार की ओर से अधिक स्पष्टता और सक्रियता दिखाई जानी चाहिए।

प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो चिंता का विषय है।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस की सोशल मीडिया विभाग प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि जहाज पर हमला करते समय यह जानकारी मौजूद थी कि उसमें भारतीय नागरिक सवार हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भारतीय नागरिकों की जान गई है तो सरकार को इस मामले में स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाना चाहिए था।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार की चुप्पी देश की विदेश नीति को लेकर कई सवाल खड़े करती है। विपक्ष का कहना है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

G7 सम्मेलन में क्यों अहम है यह मुद्दा?

G7 शिखर सम्मेलन दुनिया के सबसे प्रभावशाली वैश्विक मंचों में से एक माना जाता है। यहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होती है।

प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन में कई देशों के नेताओं से मुलाकात करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित बैठक को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा इस बैठक में उठता है, तो यह भारत की नागरिक सुरक्षा और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

विदेश नीति पर फिर शुरू हुई बहस

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब भारत अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के संबंध रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा क्षेत्रों में काफी मजबूत हुए हैं।

हालांकि विपक्ष का तर्क है कि मजबूत संबंधों का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि भारतीय नागरिकों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सवाल न उठाए जाएं।

दूसरी ओर सरकार समर्थकों का कहना है कि ऐसे मामलों में राजनयिक स्तर पर बातचीत और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाती है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की संभावित बैठक पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा बातचीत का हिस्सा बनता है या नहीं।

साथ ही इस घटना की जांच और उससे जुड़ी आधिकारिक रिपोर्ट भी आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने ला सकती है। भारतीय परिवारों और देशवासियों की उम्मीद है कि मृत नाविकों को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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