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नेहरू का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच गए मोदी! 78 साल में कितना बदला भारत, जानिए दो प्रधानमंत्रियों के दौर की पूरी कहानी

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में 10 जून 2026 का दिन एक नए रिकॉर्ड के नाम दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पंडित नेहरू के 4,398 दिनों के निर्वाचित कार्यकाल का रिकॉर्ड पार कर लिया।

हालांकि यह सिर्फ एक रिकॉर्ड की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी भी है, जिसने आजादी के बाद संघर्षों से शुरुआत की और आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना ली है।

रिकॉर्ड की कहानी क्या है?

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। लेकिन 1952 के पहले आम चुनाव तक उनका कार्यकाल अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में माना जाता है।

1952 में पहली निर्वाचित सरकार बनने के बाद नेहरू का आधिकारिक निर्वाचित कार्यकाल शुरू हुआ। अब नरेंद्र मोदी ने इसी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा है।

मोदी का पूरा कार्यकाल लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए मिला जनादेश रहा है। उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल कर तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला।

जब नेहरू ने संभाली थी देश की कमान

1947 में आजादी के समय भारत की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी।

देश विभाजन के दर्द से गुजर रहा था। करोड़ों लोग विस्थापित हुए थे। अर्थव्यवस्था कमजोर थी, उद्योग सीमित थे और अधिकांश आबादी गरीबी में जीवन बिता रही थी।

साक्षरता दर 20 प्रतिशत से भी कम थी। औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 32 वर्ष के आसपास थी। कृषि मानसून पर निर्भर थी और आधुनिक बुनियादी ढांचे का अभाव था।

ऐसे दौर में नेहरू के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी राष्ट्र निर्माण की थी।

नेहरू युग की सबसे बड़ी उपलब्धियां

पंडित नेहरू ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।

उनके कार्यकाल में संविधान लागू हुआ और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किया गया।

देश में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए कई संस्थानों की स्थापना की गई।

आईआईटी, एम्स, परमाणु ऊर्जा आयोग, सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उद्योग और अनुसंधान संस्थान इसी दौर की देन माने जाते हैं।

चुनाव आयोग, संसद और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं को मजबूत बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

2026 का भारत कितना अलग है?

आज का भारत 1947 के भारत से पूरी तरह अलग तस्वीर पेश करता है।

देश दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला राष्ट्र बन चुका है। भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभा रहा है और दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

मोबाइल इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाएं गांवों तक पहुंच चुकी हैं।

जहां कभी बिजली और सड़कें बड़ी चुनौती थीं, वहीं आज हाईवे, एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क और आधुनिक एयरपोर्ट विकास की नई पहचान बन चुके हैं।

मोदी सरकार के बड़े फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनका राष्ट्रीय राजनीति और प्रशासन पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

2016 में नोटबंदी लागू की गई।

2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हुआ, जिसने देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एकीकृत किया।

2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया।

तीन तलाक कानून लागू किया गया और महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी मिली।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा भी इसी दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल रही।

इन फैसलों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक बहस भी हुई।

इंफ्रास्ट्रक्चर में आई बड़ी तेजी

मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास को अपनी प्राथमिकताओं में रखा।

राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा। रेलवे के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत हुई।

देशभर में नए एयरपोर्ट विकसित किए गए और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया।

हर घर जल, उज्ज्वला योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने का प्रयास किया।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

पिछले एक दशक में भारत की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी भी मजबूत हुई है।

जी-20 की अध्यक्षता, वैश्विक कूटनीति में सक्रिय भूमिका और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई उपलब्धियों ने भारत की पहचान को और मजबूत किया है।

चंद्रयान और आदित्य मिशन जैसे कार्यक्रमों ने वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है।

दो दौर, दो चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि नेहरू और मोदी की तुलना केवल आंकड़ों से नहीं की जा सकती।

नेहरू के सामने एक नए राष्ट्र को खड़ा करने की चुनौती थी, जबकि मोदी के सामने तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

एक ने भारत की नींव रखी, तो दूसरे ने उसी ढांचे को आधुनिक बनाने और वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की कोशिश की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पार करना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह सिर्फ दो नेताओं के कार्यकाल की तुलना नहीं, बल्कि उस भारत की यात्रा का प्रतीक है जिसने आजादी के बाद संघर्षों से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। बदलते दौर में चुनौतियां अलग रही हैं, लेकिन दोनों प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल भारत के विकास की कहानी में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

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