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RBI का वही दांव, जिसे रघुराम राजन ने कहा था ‘बेवकूफी वाला आइडिया’! अब भारत में आ सकते हैं 100 अरब डॉलर तक विदेशी फंड

भारत: की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बार फिर FCNR(B) Swap Scheme शुरू कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि यही वह योजना है, जिसे लेकर करीब 13 साल पहले तत्कालीन RBI गवर्नर रघुराम राजन ने गंभीर आशंकाएं जताई थीं।

आज यह स्कीम फिर चर्चा में है क्योंकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसके जरिए भारत में बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी आ सकती है और रुपये को भी मजबूती मिल सकती है।

क्या है FCNR(B) Swap Scheme?

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) Deposit एक विशेष जमा योजना है, जिसमें अनिवासी भारतीय (NRI) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिक अपनी बचत को डॉलर, पाउंड, यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में जमा कर सकते हैं।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निवेशकों को अपनी विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने की जरूरत नहीं होती। इससे उन्हें विनिमय दर के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम उठाना पड़ता है।

क्यों चर्चा में आया रघुराम राजन का पुराना बयान?

अगस्त 2016 में RBI गवर्नर का कार्यकाल समाप्त होने से पहले रघुराम राजन ने 2013 के आर्थिक संकट को याद करते हुए कहा था कि विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए कई प्रस्तावों पर विचार हुआ था।

उन्होंने स्वीकार किया था कि FCNR(B) स्वैप स्कीम का विचार शुरुआत में उन्हें “पूरी तरह बेवकूफी भरा” और “बहुत खराब” लगा था। उनकी सबसे बड़ी चिंता यह थी कि RBI को मुद्रा विनिमय दर के जोखिम का बोझ उठाना पड़ सकता है।

हालांकि बाद में यही योजना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सफल साबित हुई।

2013 में कैसे बनी थी गेमचेंजर?

साल 2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता थी। उस समय भारतीय रुपया दबाव में था और विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा था।

ऐसे माहौल में RBI ने FCNR(B) स्वैप स्कीम लागू की। बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा जुटाने पर विशेष सुविधा दी गई, जिससे वे NRI निवेशकों को आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर सके।

इस पहल का परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर रहा। भारत में लगभग 26 अरब डॉलर का विदेशी फंड आया, जिससे रुपये को स्थिरता मिली और निवेशकों का विश्वास वापस लौटा।

इस बार क्यों ज्यादा असरदार मानी जा रही है योजना?

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार की FCNR(B) स्वैप स्कीम पहले से अधिक प्रभावी हो सकती है।

2013 में RBI ने बैंकों को 3.5% की विशेष सुविधा दी थी। लेकिन इस बार 30 सितंबर तक जुटाए गए नए 3 से 5 साल की अवधि वाले डिपॉजिट्स पर विदेशी मुद्रा जोखिम का पूरा भार RBI स्वयं उठाएगा।

इससे बैंकों की लागत कम होगी और वे NRI निवेशकों को अधिक आकर्षक ब्याज दरें दे सकेंगे।

कितनी पूंजी आने की उम्मीद?

ICICI Securities Primary Dealership के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि केवल FCNR(B) स्वैप स्कीम के जरिए करीब 50 अरब डॉलर तक की पूंजी भारत में आ सकती है।

वहीं सरकार और RBI द्वारा हाल ही में घोषित अन्य उपायों को मिलाकर अगले 12 से 24 महीनों में लगभग 100 अरब डॉलर तक विदेशी फंड प्रवाह संभव माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

रुपये को कैसे मिलेगा फायदा?

जब बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा देश में आती है तो डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है और रुपये पर दबाव कम होता है।

रघुराम राजन ने भी अपने बयान में कहा था कि यदि रुपये को सिर्फ 3-4 रुपये तक स्थिर रखने में सफलता मिल जाए तो आयात बिल में भारी बचत संभव है।

आज भारत का आयात बिल 775 अरब डॉलर के आसपास पहुंच चुका है। ऐसे में रुपये की मजबूती से ऊर्जा, कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत कम हो सकती है।

क्या बदल सकता है भारत का आर्थिक समीकरण?

वैश्विक ब्रोकरेज और रिसर्च संस्थानों का मानना है कि RBI और सरकार के हालिया कदमों से भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) पहले की तुलना में काफी मजबूत हो सकता है।

जहां पहले चालू वित्तीय वर्ष में भारी बाहरी घाटे की आशंका जताई जा रही थी, वहीं अब कई अर्थशास्त्री भुगतान संतुलन के सरप्लस या लगभग संतुलित रहने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं।

FCNR(B) स्वैप स्कीम एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था की चर्चा के केंद्र में है। जिस योजना को लेकर कभी रघुराम राजन को गंभीर संदेह था, वही अब भारत में विदेशी निवेश आकर्षित करने का बड़ा माध्यम बन सकती है। यदि विशेषज्ञों के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले महीनों में भारत को अरबों डॉलर की विदेशी पूंजी मिल सकती है, जिससे रुपये, विदेशी मुद्रा भंडार और समग्र अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।11

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