उत्तर प्रदेश: के संभल जिले में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को लेकर चल रही बुलडोजर कार्रवाई अब एक नए विवाद का कारण बन गई है। नखासा थाना क्षेत्र के कसेरुआ गांव में स्थित मुस्तफा कादरी मस्जिद के ध्वस्तीकरण के दौरान पुलिस को मस्जिद के मुख्य हॉल से 49 पोस्टर और एक हरे रंग का झंडा मिला, जिसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का रूप ले लिया है।
पुलिस के अनुसार, मस्जिद के ऊपरी हिस्से में बने हॉल के भीतर रखे तख्त के नीचे से बड़ी संख्या में पोस्टर बरामद किए गए। इन पोस्टरों पर “I Love Muhammad” लिखा हुआ था। इसके साथ ही एक हरे रंग का झंडा भी मिला, जिसे पुलिस ने संदिग्ध मानते हुए कब्जे में ले लिया।
इस मामले में पुलिस ने मस्जिद के मुतवल्ली जाकिर समेत आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपियों में तसलीम, जाकिर हुसैन, भूरे अली, शरफुद्दीन, दिल शरीफ, मोहब्बत अली और नन्हें के नाम भी शामिल हैं।
ध्वस्तीकरण के दौरान मिला सामान
जानकारी के मुताबिक, प्रशासन द्वारा सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। पुलिस टीम जब यह सुनिश्चित करने के लिए भवन के अंदर पहुंची कि वहां कोई व्यक्ति मौजूद न हो, तभी हॉल में रखे सामान की जांच के दौरान पोस्टर और झंडा मिला।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।

70 प्रतिशत मस्जिद ध्वस्त
प्रशासन के अनुसार, मस्जिद का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ध्वस्त किया जा चुका है। राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि को कब्रिस्तान की जमीन बताया गया है। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद कमेटी सुनवाई के दौरान निर्माण से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिसके बाद ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया।
तहसील प्रशासन का कहना है कि कब्जा हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और जल्द ही पूरी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करा लिया जाएगा।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मस्जिद का इतिहास करीब 150 वर्षों पुराना बताया जाता है और इससे जुड़े कुछ दस्तावेज मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि मामला वक्फ बोर्ड और अन्य कानूनी मंचों पर विचाराधीन है, ऐसे में कार्रवाई पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने लोगों से न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की अपील भी की।
वहीं, हरे झंडे को लेकर उठे विवाद पर बर्क ने कहा कि इस्लामिक धार्मिक आयोजनों में हरे झंडे का उपयोग सामान्य बात है और इसे किसी अन्य देश के झंडे से जोड़ना उचित नहीं है।
विधायक ने उठाए सवाल
असमोली विधायक पिंकी यादव ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
क्या कहता है कानून?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों को कारावास, जुर्माना या दोनों प्रकार की सजा हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
फिलहाल पुलिस बरामद पोस्टरों और झंडे की जांच कर रही है, जबकि प्रशासन अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई को अंतिम चरण तक पहुंचाने में जुटा हुआ है। पूरे मामले पर क्षेत्र की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।