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INDI गठबंधन में बड़ी दरार? बैठक से पहले DMK-AAP ने किया किनारा, CPM ने खरगे से मांगा जवाब

बैठक से पहले ही बढ़ी तकरार, क्या विपक्षी एकता पर मंडरा रहा संकट?

लोकसभा चुनाव: के बाद विपक्षी दलों के महागठबंधन INDI ब्लॉक की एक अहम बैठक सोमवार को नई दिल्ली में होने जा रही है। लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही गठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। एक तरफ आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुद को गठबंधन से अलग कर लिया है, वहीं डीएमके (DMK) ने बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है। दूसरी ओर सीपीआई (एम) ने कांग्रेस नेतृत्व से तीखे सवाल पूछ दिए हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विपक्षी गठबंधन अपनी एकजुटता बनाए रखने में सफल होगा या अंदरूनी विवाद इसकी सबसे बड़ी चुनौती बन जाएंगे।

CPM ने कांग्रेस से मांगा जवाब

सूत्रों के मुताबिक, सीपीआई (एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में केरल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए उन आरोपों पर सवाल उठाया गया है, जिनमें सीपीआई (एम) और बीजेपी के बीच कथित राजनीतिक समझ होने की बात कही गई थी।

सीपीआई (एम) का कहना है कि ऐसे आरोप विपक्षी एकता और गठबंधन की भावना के खिलाफ हैं। पार्टी का मानना है कि यदि विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़नी है, तो सहयोगी दलों के बीच सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से बचना होगा।

राहुल गांधी के बयान पर नाराजगी

लेफ्ट नेताओं की नाराजगी केवल स्थानीय कांग्रेस नेताओं तक सीमित नहीं है। पार्टी ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष खरगे द्वारा चुनावी प्रचार के दौरान दिए गए बयानों को भी गंभीरता से लिया है।

सीपीआई (एम) का कहना है कि इन बयानों ने गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच अविश्वास पैदा किया है। यही वजह है कि पार्टी कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा सांसद और सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकते हैं।

DMK और AAP की दूरी ने बढ़ाई चिंता

INDI गठबंधन के लिए सबसे बड़ा झटका DMK और आम आदमी पार्टी के रुख से लगा है।

आम आदमी पार्टी पहले ही सार्वजनिक रूप से गठबंधन से दूरी बना चुकी है। वहीं तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी DMK ने इस बैठक में शामिल न होने का फैसला किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रमुख सहयोगी दलों की अनुपस्थिति विपक्षी एकता की तस्वीर को कमजोर कर सकती है और बीजेपी को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है।

बैठक में शामिल होंगे कई बड़े नेता

हालांकि बैठक में कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हो सकते हैं।

बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को लेकर साझा रणनीति तैयार करना बताया जा रहा है।

विपक्षी एकता की अग्निपरीक्षा

हालिया विधानसभा चुनावों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह बैठक विपक्षी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्ष की कोशिश है कि संसद और राज्यों में बीजेपी के खिलाफ एक साझा एजेंडा तैयार किया जाए।

लेकिन जिस तरह से गठबंधन के भीतर मतभेद सामने आ रहे हैं, उससे विपक्षी एकता की राह आसान नहीं दिख रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस और सहयोगी दलों के बीच संवाद बेहतर नहीं हुआ, तो आने वाले चुनावों में गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्या निकलेगा कोई समाधान?

अब सभी की नजर सोमवार की बैठक पर टिकी है। राजनीतिक पर्यवेक्षक यह देखने को उत्सुक हैं कि क्या कांग्रेस CPM की नाराजगी दूर कर पाएगी और क्या गठबंधन के भीतर बढ़ रही दूरियों को कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

बैठक केवल रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह विपक्षी दलों की आपसी एकजुटता की भी परीक्षा साबित हो सकती है।

INDI गठबंधन की अहम बैठक से पहले ही DMK और AAP के अलग रुख तथा CPM की नाराजगी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस पर लगे आरोपों और सहयोगी दलों की नाराजगी को देखते हुए यह बैठक गठबंधन के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। यदि मतभेद दूर नहीं हुए, तो विपक्ष की साझा रणनीति पर असर पड़ सकता है।

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