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“मैं रहूं न रहूं… हमेशा साथ रहूंगा”, प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश; तबीयत बिगड़ने के बाद 9 दिन से बंद पदयात्रा

मथुरा: के वृंदावन से एक भावुक और आध्यात्मिक संदेश सामने आया है, जिसने लाखों भक्तों को भावुक कर दिया। प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपनी खराब तबीयत के बीच एक वीडियो संदेश जारी कर अपने शिष्यों और भक्तों से कहा कि वे उनकी चिंता न करें और अपना मन केवल श्रीजी के भजन में लगाएं।

करीब 1 मिनट 19 सेकेंड के इस वीडियो में प्रेमानंद महाराज बेहद शांत और भावुक अंदाज में कहते नजर आए—
“बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में हम रहेंगे।”

उनके इस संदेश ने सोशल मीडिया पर भक्तों को भावुक कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद हजारों लोगों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

9 दिनों से बंद है पदयात्रा

गौरतलब है कि प्रेमानंद महाराज पिछले 9 दिनों से अपनी प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा पर नहीं निकल रहे हैं। 17 मई को पहली बार उनके शिष्यों ने लाउडस्पीकर पर घोषणा की थी कि महाराज जी की तबीयत खराब है और फिलहाल पदयात्रा स्थगित की जा रही है।

उस दिन हजारों भक्त तड़के 3 बजे उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन जब महाराज नहीं आए तो श्रद्धालु मायूस होकर लौट गए।

प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा वृंदावन की सबसे चर्चित आध्यात्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। हर दिन हजारों भक्त केवल उनके दर्शन के लिए रातभर सड़क किनारे खड़े रहते थे। वीकेंड और त्योहारों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी।

“हमारा मौन आपके लिए है”

वीडियो संदेश में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि उनका एकांतवास और मौन उनके लिए नहीं बल्कि भक्तों के लिए है। उन्होंने कहा—
“हम भजन अपने लिए नहीं कर रहे। हमारा जो होना था, हो चुका। अब जो कुछ हो रहा है, वह सब आपके लिए हो रहा है।”

उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि वे चिंता और भय छोड़कर केवल नाम जप करें। महाराज ने कहा कि गुरु हमेशा अपने शिष्यों के साथ रहते हैं, चाहे वे सामने हों या नहीं।

उनके इस संदेश को भक्त आध्यात्मिक संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि महाराज अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित भक्तों को मानसिक रूप से मजबूत करना चाहते हैं।

दोनों किडनी खराब, नियमित डायलिसिस जारी

जानकारी के अनुसार प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी दोनों किडनियां खराब हैं और उन्हें सप्ताह में 2 से 3 बार डायलिसिस कराना पड़ता है।

हालांकि, बीमारी के बावजूद वह लगातार भजन, प्रवचन और पदयात्रा करते रहे। यही वजह है कि भक्त उनकी सहनशक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा को अद्भुत मानते हैं।

तीन दिन पहले वे केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित अपने गुरु संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन करने भी पहुंचे थे। उस दौरान उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं।

13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर

प्रेमानंद महाराज का जीवन भी किसी प्रेरणादायक कथा से कम नहीं है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अखरी गांव में हुआ था। बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था।

कहा जाता है कि वे बचपन से ही आध्यात्मिक स्वभाव के थे। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और काशी पहुंच गए। वहां उन्होंने ब्रह्मचारी जीवन अपनाया और बाद में गुरुदीक्षा ली।

इसके बाद वे वृंदावन आए और धीरे-धीरे राधावल्लभ संप्रदाय से जुड़ गए। आज प्रेमानंद महाराज देश-विदेश में लाखों लोगों के बीच भक्ति और प्रेम का संदेश देने वाले संत के रूप में पहचाने जाते हैं।

भक्तों में भावुकता का माहौल

महाराज की तबीयत को लेकर भक्त लगातार प्रार्थना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर “जल्दी स्वस्थ हो महाराज” और “राधे-राधे” जैसे संदेश लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।

उनके आश्रम के बाहर भी श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं हुई है। भक्त सिर्फ एक झलक पाने और उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए पहुंच रहे हैं।

प्रेमानंद महाराज का यह भावुक संदेश केवल स्वास्थ्य अपडेट नहीं बल्कि आध्यात्मिक भरोसे का संदेश भी है। उन्होंने अपने भक्तों को डर और चिंता छोड़कर भक्ति और नाम जप में मन लगाने की सीख दी है। खराब स्वास्थ्य के बावजूद उनका विश्वास और शांत भाव लाखों लोगों को प्रेरित कर रहा है।

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