राजस्थान: के Rawatbhata में आज सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए एक बड़ी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित यह शहर, जो चंबल नदी के किनारे बसा है, “न्यूक्लियर सिटी” के नाम से भी जाना जाता है। आज शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक पूरे शहर को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा, जहां जंग जैसी स्थिति का अभ्यास किया जाएगा।
सायरन और अलर्ट से गूंजेगा शहर
इस विशेष अभ्यास के दौरान पूरे शहर में हर घंटे सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में लोग अलर्ट सिस्टम को समझें और तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें।
ड्रिल का सबसे अहम हिस्सा रात 8 बजे होगा, जब पूरे शहर में 5 मिनट के लिए टोटल ब्लैकआउट किया जाएगा। इस दौरान बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद रहेगी, ताकि संभावित हवाई हमले जैसी स्थिति में अंधेरे के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित करने का अभ्यास किया जा सके।
किन-किन स्थानों पर होगा अभ्यास
इस मॉक ड्रिल के तहत शहर के संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इनमें Rana Pratap Sagar Dam, भारी पानी संयंत्र और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठान शामिल हैं।
इन स्थानों पर संभावित खतरों जैसे हवाई हमले, गैस रिसाव और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के उपायों का परीक्षण किया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती
ड्रिल के दौरान कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय रहेंगी, जिनमें National Disaster Response Force (NDRF), State Disaster Response Force (SDRF) और Central Industrial Security Force (CISF) शामिल हैं।
इन एजेंसियों की टीमें मौके पर तैनात रहकर विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने का अभ्यास करेंगी। इसके अलावा, Kota से भी विशेष टीमें बुलाई गई हैं, जो इस ड्रिल को और प्रभावी बनाने में सहयोग करेंगी।

मोबाइल पर मिलेगा इमरजेंसी अलर्ट
इस बार की ड्रिल में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जैसे ही ड्रिल के दौरान इमरजेंसी घोषित होगी, Bharat Sanchar Nigam Limited के माध्यम से सभी मोबाइल यूजर्स को अलर्ट मैसेज भेजा जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट के समय सूचना तेजी से लोगों तक पहुंचे और वे उचित कदम उठा सकें।
क्यों जरूरी है यह ड्रिल?
रावतभाटा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहां परमाणु और औद्योगिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं, सुरक्षा तैयारियों को समय-समय पर परखना बेहद जरूरी होता है। इस तरह की मॉक ड्रिल से यह आकलन किया जाता है कि आपातकालीन स्थिति में विभिन्न एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर सकती हैं।
इसके अलावा, यह ड्रिल प्रशासन और नागरिकों के बीच समन्वय को भी मजबूत करती है।
नागरिकों से सहयोग की अपील
प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस ड्रिल के दौरान घबराएं नहीं और पूरी तरह सहयोग करें। सायरन या अलर्ट को वास्तविक खतरा समझने की बजाय इसे अभ्यास का हिस्सा मानें और निर्देशों का पालन करें।
यह भी कहा गया है कि ब्लैकआउट के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें।
रावतभाटा में आयोजित यह मेगा मॉक ड्रिल न केवल सुरक्षा तैयारियों का परीक्षण है, बल्कि यह नागरिकों को जागरूक करने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार करने का एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इस तरह के अभ्यास भविष्य में किसी भी बड़े खतरे से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।