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एनडीए में सीट बंटवारे की जटिल राजनीति: कब होगा अंत और कौन बनेगा बड़ा खिलाड़ी?

एनडीए में सीट बंटवारे का ड्रामा: कब खत्म होगा इंतजार?

बिलकुल! आपके दिए गए टेक्स्ट को करीब 500 शब्दों में विस्तार से और नए अंदाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ:


बिहार चुनाव 2025: एनडीए में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तैयार, लेकिन देरी क्यों?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के बीच सीट बंटवारे को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है। इस बार बीजेपी बिहार में ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभा सकती है, और चिराग पासवान की पार्टी को मिलने वाली सीटों की संख्या का भी गणित लगभग अंतिम रूप ले चुका है।

फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान का इंतजार किया जा रहा है। दशहरे के बाद अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह में चुनाव आयोग चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। चुनाव आयोग के इस ऐलान के बाद ही एनडीए में सीटों का आधिकारिक बंटवारा किया जाएगा। लेकिन सीटों के बंटवारे में देरी क्यों हो रही है, इसके पीछे भी राजनीतिक रणनीतियाँ और गंभीर कारण हैं।

सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर के पहले सप्ताह तक एनडीए के घटक दलों में सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके पहले प्रारंभिक दौर की बातचीत इस महीने के अंत तक पूरी हो सकती है। इस देरी का एक मुख्य कारण उम्मीदवारों के आखिरी वक्त में पाला बदलने से बचाव है। यदि जल्दी सीटों का बंटवारा कर दिया जाए, तो उम्मीदवार गठबंधन से बाहर जाकर अन्य दलों का रुख कर सकते हैं, जिससे गठबंधन कमजोर हो सकता है। इसलिए सीट बंटवारे की प्रक्रिया को चुनाव आयोग के तारीखों के ऐलान तक टाला जा रहा है ताकि गठबंधन में स्थिरता बनी रहे।

एनडीए के छोटे-छोटे घटक दल इस बार भी अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं, जिससे सीटों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान भी बनी हुई है। खासकर चिराग पासवान के तेवर अभी भी गर्म हैं। चिराग के समर्थक उन्हें बिहार का अगला मुख्यमंत्री बताकर गठबंधन के भीतर उनकी अहमियत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि चिराग पासवान खुद स्पष्ट कर चुके हैं कि नीतीश कुमार ही एनडीए का मुखिया और बिहार के चुनावी चेहरे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि सीट बंटवारे में उन्हें सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए और इसमें किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता इस बात का दावा करते हैं कि चिराग पासवान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानते हैं और वे एनडीए छोड़कर किसी अन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछला बिहार विधानसभा चुनाव चिराग पासवान ने अकेले लड़ा था, जिससे जेडीयू को नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार गठबंधन के भीतर उनका शामिल होना एनडीए की ताकत को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

कुल मिलाकर बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला तैयार तो कर लिया है, लेकिन चुनाव आयोग की तारीखों के ऐलान का इंतजार इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी है। इस देरी के पीछे गठबंधन की स्थिरता और उम्मीदवारों की स्थिति को देखते हुए रणनीतिक सोच काम कर रही है।

इस बार बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में सीट बंटवारे को लेकर सभी दलों की तालमेल और समझौता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव में जीत के लिए सामंजस्य और एकता जरूरी है। देखना होगा कि अक्टूबर में चुनाव आयोग की तारीखों की घोषणा के बाद एनडीए अपने फॉर्मूले पर कितनी तेजी से सहमति बना पाता है और चिराग पासवान का कद कितना मजबूत होता है।


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