“गौ रक्षा को लेकर शंकराचार्य का बड़ा ऐलान: हर विधानसभा में गौ रक्षक उम्मीदवार, राजनीति कितनी संभालेगी?”

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का गौ रक्षा और राजनीति पर बयान
पूर्णिया, बिहार: सनातन धर्म के प्रमुख गुरु और जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को माता सीता की स्थली पुनौरा धाम से गौ मतदाता संकल्प यात्रा की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने गौ रक्षा के महत्व पर जोर देते हुए सभी राजनीतिक दलों को आड़े हाथों लिया। शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि आज तक कोई भी राजनीतिक दल गौ रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध नहीं रहा। इसी कारण वे हर विधानसभा क्षेत्र से ‘गौ रक्षक प्रत्याशी’ को चुनावी मैदान में उतारने की योजना बना रहे हैं।
शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी आरोप लगाए। उनका कहना था कि स्वतंत्रता के बाद से विभिन्न सरकारों ने गौ हत्या की घटनाओं को रोकने में विफलता दिखाई है और इस अपराध के लिए वर्तमान सरकारें भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर गौ रक्षक उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो इसका खामियाजा किसे भुगतना पड़ेगा और कौन इस मुद्दे पर राजनीति करेगा।
उन्होंने राजनेताओं पर सनातनियों को बांटने का आरोप भी लगाया। शंकराचार्य ने कहा कि हमारे सनातन धर्म में चार वर्णों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—की व्यवस्था भगवान द्वारा बनाई गई है और वे सभी भाई-भाई हैं। लेकिन राजनीति और नेताओं की गलत नीतियों के कारण सनातन धर्म के अनुयायियों को आपस में लड़ाया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप हमारे धर्म और समाज में असंतुलन पैदा हो रहा है और सनातन धर्म कमजोर हो रहा है।
शंकराचार्य ने गौ संरक्षण पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि जिस गाय को हम माता मानकर पूजते हैं, उसे हमारे ही देश में काटकर उसके मांस का व्यापार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इसे आर्थिक लाभ के लिए अनुमति दे रही है, जबकि यही सरकार सनातनियों के वोट से सत्ता में आती है। उन्होंने सवाल उठाया कि “हमारा वोट लेकर हमारी माता को ही काटोगे? यह दुर्भावना आजादी के बाद से लगातार जारी है।”
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि गौ रक्षा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सभी सनातन धर्म के अनुयायियों से अपील की कि वे गौ रक्षा के मुद्दे पर जागरूक रहें और इसे राजनीति के जरिए प्रभावित न होने दें। उनका मानना है कि यदि हर विधानसभा क्षेत्र में गौ रक्षक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो यह न केवल गायों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना भी बढ़ाएगा।
इस अवसर पर शंकराचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि वे राजनीतिक दलों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन गौ रक्षा को प्राथमिकता देने वाले उम्मीदवारों को समर्थन देंगे। उन्होंने कहा कि गौ माता हमारी संस्कृति और हमारी पहचान का प्रतीक हैं। उनके संरक्षण के बिना हमारा धर्म और समाज पूर्ण नहीं हो सकता।
अंत में, शंकराचार्य ने कहा कि गौ संरक्षण के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की राजनीति न हो और यह मुद्दा धर्म और संस्कृति की रक्षा के रूप में देखा जाए। उनका यह संदेश स्पष्ट है कि सनातन धर्म के अनुयायी अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से खड़े रहें और गौ रक्षक उम्मीदवारों को वोट देकर समाज में बदलाव लाएं।