JMM की चाल या महागठबंधन की मजबूरी? बिहार चुनाव में नई सियासी पटकथा!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: JMM की एंट्री से बदलेगा समीकरण, 12 सीटों पर दावा लेकिन कितनी मिलेगी?
बिहार की सियासत में इस बार कई नए चेहरे और पुराने खिलाड़ी नए समीकरणों के साथ उतर रहे हैं। खास तौर पर झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बिहार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की पूरी तैयारी कर ली है। शनिवार को RJD नेता तेजस्वी यादव के आवास पर हुई बैठक में JMM के महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) में शामिल होने की औपचारिक घोषणा कर दी गई। इसके बाद से सबसे बड़ा सवाल यह है कि JMM बिहार की कौन-कौन सी सीटों से चुनाव लड़ेगी, और उन्हें गठबंधन से कितनी सीटें मिलने की उम्मीद है?
JMM ने महागठबंधन के सामने 12 विधानसभा सीटों पर दावेदारी जताई है। ये सीटें मुख्य रूप से कोयलांचल क्षेत्र, संथाल परगना से सटे जिले, और आदिवासी बहुल इलाके हैं, जैसे कटोरिया, झाझा, बांका, चेनारी, रामगढ़, नवीनगर, गोविंदपुर, और मधुपुर से सटे सीमावर्ती क्षेत्र। इन क्षेत्रों में झारखंड के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक समानता देखी जाती है, जहां JMM की राजनीतिक पकड़ थोड़ी बहुत मौजूद है।
हालांकि, महागठबंधन में सीटों का बंटवारा आसान नहीं होगा। राजद, कांग्रेस, वाम दल और अब JMM – सभी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में हैं। गठबंधन सूत्रों की मानें तो JMM को 4 से 6 सीटें मिलने की संभावना है। RJD की कोशिश है कि JMM को सीमित सीटें दी जाएं ताकि उनका वोट बैंक प्रभावित न हो, लेकिन हेमंत सोरेन अपने प्रभाव वाले इलाकों में चुनाव लड़ने को लेकर अडिग नजर आ रहे हैं।
अगर JMM के पिछले प्रदर्शन की बात करें, तो बिहार में पार्टी ने कभी बड़ा असर नहीं डाला। हालांकि सीमावर्ती जिलों में उनकी उपस्थिति ज़रूर रही है। 2020 के विधानसभा चुनावों में JMM ने बिहार में कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली। अब महागठबंधन के साथ आकर पार्टी को उम्मीद है कि संयुक्त वोट बैंक और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता का लाभ उन्हें मिल सकता है।
वहीं, अगर झारखंड की बात करें तो JMM ने 2019 में RJD को 7 सीटें दी थीं, लेकिन उनमें से RJD को जीत सिर्फ 1 सीट पर ही मिली थी। मौजूदा समय में झारखंड विधानसभा में RJD के 1 ही विधायक हैं।
JMM का महागठबंधन में शामिल होना सिर्फ सीटों का जोड़ नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत में विपक्षी एकजुटता की एक बड़ी रणनीति भी मानी जा रही है। हेमंत सोरेन की यह कोशिश है कि झारखंड की सीमाओं से बाहर निकलकर बिहार में भी पार्टी का विस्तार हो।
अब देखना यह है कि गठबंधन के भीतर बातचीत किस दिशा में जाती है और हेमंत सोरेन की पार्टी को बिहार की राजनीति में कितनी जमीन मिलती है। यह तय है कि अगर JMM को प्रभावशाली सीटें मिलती हैं, तो चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है।