PM की मां पर बयान से तेजस्वी क्यों भड़के? उठाया BJP के दोहरे रवैये का मुद्दा!

तेजस्वी यादव का पलटवार: “प्रधानमंत्री तब कहां थे जब हमारी मां-बहनों को गालियां दी गईं?”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को अपशब्द कहे जाने को लेकर देश भर में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वहीं इस मुद्दे पर अब बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मां एक सम्मानजनक और भावनात्मक शब्द है, जिससे हर किसी को सुकून मिलता है। “मां तो बेजुबान जानवर की भी होती है। किसी भी मां के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है और हमारी पार्टी इसके सख्त खिलाफ है।”
तेजस्वी यादव ने साफ किया कि यह उनके संस्कारों का हिस्सा नहीं है कि किसी की मां या महिला को लेकर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाए। लेकिन उन्होंने इस बहाने बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप भी लगाया।
तेजस्वी ने याद दिलाया कि कैसे खुद प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनावी रैलियों में तीखे और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने खुद सोनिया गांधी को टारगेट किया, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल उठाए। तब क्या यह भाषा मर्यादा में थी?”
इतना ही नहीं, तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बीजेपी के विधायक स्वयं विधानसभा में उनके लिए और उनकी मां एवं बहन के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “मैं खुद सदन में मां-बहन की गाली सुन चुका हूं, क्या तब प्रधानमंत्री कुछ बोले थे?”
तेजस्वी ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब हमारी पार्टी की प्रवक्ता सारिका पासवान को सड़क पर निर्वस्त्र घुमाने की धमकी दी गई, तब प्रधानमंत्री की संवेदनाएं कहां थीं? आज उन्हीं लोगों को बीजेपी पार्टी में शामिल कर रही है और उन्हें सम्मान भी दिया जा रहा है।”
तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी की राजनीति सिर्फ दिखावे और मौकापरस्ती पर आधारित है। उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि लोग सब देख और समझ रहे हैं। “जनता जानती है कि कौन दिखावटी है और कौन सच्चाई के साथ खड़ा है। यह दिखावटी और मिलावटी राजनीति अब ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है।”
इस तरह तेजस्वी यादव ने न केवल प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए बल्कि यह भी जताया कि बीजेपी जब विपक्ष में होते हुए या खुद निशाने पर होती है, तब ऐसे मुद्दों को उठाती है। लेकिन जब वही चीजें उनके अपने नेताओं द्वारा की जाती हैं, तब मौन साध लिया जाता है।
बिहार की राजनीति में यह बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आगे और तेज होने की संभावना है, क्योंकि विधानसभा चुनाव की दस्तक नज़दीक है और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।