“सीटों का खेल या सत्ता की चाल? NDA में सीट बंटवारे पर मचा सियासी घमासान!”

बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग पर खींचतान! चिराग पासवान ने फंसाया पेंच, बीजेपी-जेडीयू में बन गई सहमति?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज़ हो गई हैं। इस बार भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तहत भाजपा (BJP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और कुछ अन्य छोटे दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। लेकिन इस पूरे समीकरण में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने एक नया पेच डाल दिया है।
बीजेपी और जेडीयू के बीच फॉर्मूला लगभग तय
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों को लेकर एक संतुलित सहमति बन चुकी है। दोनों ही दल लगभग बराबरी की सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। संभावित फॉर्मूले के तहत जेडीयू को 102 से 103 सीटें और बीजेपी को 101 से 102 सीटें दी जा सकती हैं। यह फॉर्मूला एक सधी हुई रणनीति को दर्शाता है, जहां दोनों पार्टियां एक-दूसरे को बराबर की राजनीतिक ताकत मानते हुए आगे बढ़ रही हैं।
इससे पहले यह भी चर्चा थी कि जेडीयू को ‘बड़ा भाई’ बनाकर थोड़ी अधिक सीटें दी जा सकती हैं, लेकिन बीजेपी की बढ़ती स्थिति को देखते हुए अब दोनों को लगभग बराबर सीटें देने की बात कही जा रही है।
चिराग पासवान का रुख बना नई चुनौती
जहां एक तरफ बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट बंटवारा लगभग तय हो चुका है, वहीं चिराग पासवान की पार्टी ने अपनी मांगों से इस फॉर्मूले को जटिल बना दिया है। चिराग ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं और अपनी पार्टी की ताकत का हवाला देते हुए उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो वह अकेले भी मैदान में उतर सकते हैं।
चिराग की यह जिद एनडीए के भीतर असंतुलन पैदा कर सकती है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी चिराग ने अलग राह अपनाई थी, जिसका असर कई सीटों पर एनडीए को नुकसान के रूप में देखने को मिला था।
हम और कुशवाहा की भी नजरें टिकीं
एनडीए के अन्य सहयोगी जैसे हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD) के नेता उपेंद्र कुशवाहा भी अपने-अपने हिस्से की सीटों पर मोलभाव कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन्हें 5–7 सीटें दी जा सकती हैं, लेकिन यह अंतिम फैसला भाजपा और जेडीयू के बीच समन्वय के बाद ही संभव होगा।
क्या बनेगा एनडीए का फाइनल फॉर्मूला?
बिहार में एनडीए की ताकत इस बार बड़े स्तर पर सीटों के न्यायसंगत बंटवारे और सामंजस्य पर निर्भर करेगी। यदि चिराग पासवान जैसे नेता मनाने में कामयाब हो जाते हैं, तो एनडीए एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतर सकता है। अन्यथा, अंदरूनी मतभेद 2020 की तरह इस बार भी असर डाल सकते हैं।
फिलहाल, राजनीतिक हलचलों पर सभी की निगाहें टिकी हैं। आने वाले दिनों में सीट बंटवारे को लेकर तस्वीर और साफ होगी। लेकिन इतना तय है कि चुनावी गणित जितना आसान दिखता है, उतना होता नहीं।